उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली सरकार भू कानून और मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियमों में सुधार करने जा रही है। सीएम धामी ने निर्देश दिया है कि राज्य के व्यापक हित में पूर्व में गठित भू-कानून समिति की अनुशंसा पर कार्यवाही हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसको लेकर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।
यह समिति राज्य सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले भू-कानून के प्रारूप के साथ ही मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मानकों का निर्धारण करने में भी अपनी संस्तुति शासन को उपलब्ध कराएगी। धामी ने कहा कि उनके लिये राज्य हित सर्वोपरि है। राज्यवासियों ने जिस संकल्प के साथ राज्य निर्माण का सपना देखा है, उसे पूर्ण करने के लिये वे निरंतर प्रयासरत है। भू-कानून हो या मूल निवास प्रमाण पत्र का विषय राज्य सरकार संजीदगी के साथ राज्यवासियों के साथ है।

गौर करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने अगस्त 2022 में ही भूमि सुधार अधिनियम की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इसमे संगठन, संस्थाओं के विचारों पर विचार को लेकर 80 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिसके बाद राज्य में जिला मजिस्ट्रेटों की ओर से दी गई भूमि अधिग्रहण की मंजूरी की जांच की गई।
समिति ने अपनी सिफारिशों में मुख्य रूप से भूमि संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपने सुझाव दिए थे। प्रदेश में विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए, रोजगार के अवसर को पैदा करने पर जोर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सरकार विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों को मदद करने का निरंतर प्रयास करती है और इसको विशेष महत्व देती है। फिर वह भूमि से जुड़े कानून हो या फिर मूल निवास पत्र जारी करने से जुड़े हो।
प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया है कि एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद जरूरी दिशा निर्देश जारी कि जा रहे हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति में विषय विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। जोकि भूमि कानून को लागू करने और मूल निवास प्रमाण पत्र को जारी करने के मानकों को निर्धारित करेंगे।


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