उत्तर प्रदेश में स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए योगी सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। प्रदेश में परिषदीय स्कूलों का डिजिटाइजेशन होने जा रहा है, जिसके बाद स्कूलों के शिक्षकों को रजिस्टर से मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए प्रदेश के स्कूलों में तैयारियों को तेज कर दिया गया है। प्रदेश के स्कूलों में 12 रजिस्टरों का डिजिटाइजेशन किया जाएगा।
शुरुआती दौर में लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, श्रावस्ती के सभी परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट, कस्तूरबा गाधी विद्यालयों में डिजिटाइजेशन किया जाएगा। यहां पर 20 नवंबर 2023 में ही भौतिक और डिजिटल दोनों ही माध्यम में रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया गया है।

डिजिटाइजेशन को लेकर विकास खंड स्तर पर बीईओ एचटी की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में प्रिंसिपल, इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को डिजिटल रजिस्टर के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस दौरान बैठक में इन लोगों को टैबलेट मुहैया कराए जाएंगे।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा के आदेश के बाद स्कूलों में रजिस्टरों का डिजिटाइजेशन करने का काम तेज कर दिया गया है। प्रधानाध्यापक और इंचार्ज प्राधानाध्यपकों को बीईओ डिजिटल रजिस्टर के बारे में जानकारी देंगे। इसके जरिए स्कूलों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मदद मिलेगी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों का डिजिटाइजेशन होने के बाद स्कूलों में शिक्षकों को अपनी उपस्थिति इसके माध्यम से ही दर्ज करनी होगी। ऐसे में अब शिक्षकों को डिजिटाइजेशन के बाद टैबलेट से उपस्थिति देनी है, जिसकी वजह से रजिस्टर में गलत साइन करने जैसी गड़बड़ियां पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी।


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