पान केवल बेहरीन स्वाद के कारण ही नहीं जाता है बल्कि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट गुण होने कारण पान कई बीमारियों के इलाज के अलावा स्किन के लिए काफी फायदेमंद होता है। ये ही कारण है कि पान के पत्तों की डिमांग लगातार बढ़ती जा रही है। यूपी सरकार पानी की मांग को देखते हुए पान की की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही पानी की खेती करने वाले किसानों को सब्सिडी भी दे रही है।

प्रदेश सरकार का उद्देश्य पान की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना है। यूपी की योगी सरकार पान की खेती करने वाले किसानों को 75000 रुपये तक की सब्सिडी दे रही है।
सरकारी अधिकारियों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार किसानों को पान की खेती करने के लिए 1500 वर्गमीटर में प्रति बरेजा को बनाने में 1,51,360.00 रुपये की लागत लगती है। इस कुल लागत का 50 प्रतिशत प्रदेश की योगी सरकार की ओर से किसानों को दिया जाएगा। यानी 75.680.00 रुपये किसानों को सरकार दे रही है।
पान की खेती पर आने वाला बचा हुए खर्च के लिए किसान को खुद धनराशि खर्च करनी होगी। अधिकारियों के अनुसार जिलेवार बरेजा निर्माण के लिए निर्धारित भौतिक लक्ष्य के आधार पर 12 जिलों में कुल 63 बरेजा का निर्माण किया जाना है।
प्रदेश की योगी सरकार ये सब्सिडी की सुविधा पान की देशी, बंगला, कलकतिया, कपूरी, रामटेक, मंघही, बनारसी आदि उन्नतशील प्रजातियों की खेती करने पर ही किसान को देगी। इसका मतलब है कि इन प्रजातियों के पान की खेती करने वाले को ही प्रदेश सरकार अनुदान देगी।
इतना ही नहीं योगी सरकार प्रदेश के किसानों को पान की खेती की तकनीकी जानकारी के लिए तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाये। तकनीकी जानकारी तक पहुंच को आसान बनाने के लिए किसानों को तकनीकी सहायता भी दी जाएगी।
इसके लिए किसानों का चयन पान की खेती की ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा। लाभार्थी किसानों को विभागीय अनुसंधान केन्द्रों में वैज्ञानिकों, पान विशेषज्ञों और भारत सरकार के संस्थानों के पान विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलावाया जाएगा।
जानें पान की खेती के लिए कैसे मिलेगी अनुदान राशि
- किसानों के बैंक खाते में अनुदान का पूरा पैसा सरकार जमा करवाएगी
- लाभार्थी किसानों से एक कांट्रैक्ट लेटर भरना होगा
- अगर किसान इस अनुदान राशि को पान की खेती पर नहीं खर्च करता है तो सब्सिडी राशि किसान से सरकार वापस ले वसूलेगी।
- मानक और नियमों के आधार पर लाभार्थी किसान अगर काम नहीं करता है तो सम्बन्धित जनपद के डीएम से अनुमति लेकर अनुदान राशि किसान से वसूली जाएगी।
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