तेलंगाना सरकार में मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा है कि तेलंगाना सरकार प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को पुनर्जीवित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि असल में किसानों के खेतों की सिंचाई इस प्रोजेक्ट से पूरी होती है। जबकि कालेश्वरम को बीआरएस की 'भूल' है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। मंत्री ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना की न्यायिक जांच तेज की जाएगी।
सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि 21 अक्टूबर को मेडीगड्डा बैराज के एक खंभे की नींव के लगभग 5 फीट की गहराई तक धंसने के कारणों की जांच की जा रही है। मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट और निष्कर्षों को सीएम ए रेवंत रेड्डी के साथ साझा किया जाएगा। सिंचाई मंत्री ने कहा कांग्रेस सरकार मामले में दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री ने ये बात मेडीगड्डा साइट पर कालेश्वरम परियोजना की समीक्षा के दौरान कही। मंत्री ने कहा कि सरकार कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना (KLIS) के कार्यान्वयन में हुई अनियमितताओं की न्यायिक जांच शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाएगी। सिंचाई मंत्री भूपालपल्ली जिले के मेदिगड्डा बैराज में केएलआईएस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की एक प्रस्तुति देखने के बाद बोल रहे थे। इस मौके पर समीक्षा बैठक में उनके साथ अन्य कैबिनेट सहयोगियों प्रभाकर, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, डी श्रीधर बाबू और कोमाटिरेड्डी वेकाटारेड्डी भी मौजूद थे।
बता दें कि बीआरएस सरकार ने केएलआईएस पर ₹95,000 करोड़ खर्च किए, हालांकि सीडब्ल्यूसी ने केवल केएलआईएस पर ₹80,000 करोड़ के खर्च को मंजूरी दी, लेकिन 1 लाख एकड़ से अधिक की सिंचाई नहीं की जा सकी। दरअसल, केएलआईएस की कुल अनुमानित लागत 1.27 लाख करोड़ रुपये थी। प्रति वर्ष ₹30,000 करोड़ की दर से धनराशि उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि ₹10,000 करोड़ के बिल अभी भी सरकार के पास मंजूरी के लिए लंबित थे, उन्होंने बताया कि दिन के अंत में, शेष दो परियोजनाओं अन्नाराम और सुंदिला को भी नुकसान हुआ। सिंचाई मंत्री ने पूर्व की बीआरएस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केएलआईएस के डिजाइन में बदलाव का एक राजनीतिक दृष्ठिकोण से किया गया। हालांकि मंत्री ने पलामुरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए इसे राष्ट्रीय-परियोजना का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सामने मजबूती से मांग रखने की बात कही।
बंद पड़ी प्राणहिता- चेवेल्ला परियोजना
यह याद करते हुए कि दिवंगत वाईएस राजशेखर रेड्डी संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब प्राणहिता चेवेल्ला परियोजना की परिकल्पना और जमीन कैसे तैयार की गई थी, उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने पहल करके महाराष्ट्र में जलमग्न होने की समस्या का भी समाधान किया था, हालांकि यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी, जिसका हल पड़ोसी राज्य की सरकार से बातचीत के जरिए नहीं निकाला जा सकता था। मंत्री ने बीआरएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को बीच में ही छोड़ दिया गया और उसकी जगह केएलआईएस पर राज्य का पैसा खर्च किया गया। जबकि प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना में ₹38,000 करोड़ की लागत से 16 लाख एकड़ भूमि के निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।
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