विदेश में रह रहे श्रमिकों को अपने गृह क्षेत्र में रोजगार देने की नीति बनाने वाला तेलंगाना भारत का पहला प्रदेश बनने जा रहा है। दरअसल, यहां राज्य सरकार श्रम बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेशों से लौटने वाले प्रवासी भारतीयों को तकनीकी और कौशल प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है। जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत में रहकर रोजगार के जरिए अपनी आय बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त होगा।
तेलंगाना के प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी संख्या है। एक अनुमान के मुताबिक राज्य के कुल विदेश में रह रहे प्रवासियों में से 70 प्रतिशत निजामाबाद, हैदराबाद, करीमनगर और जगतियाल से हैं। ऐसे श्रमिकों के लिए तेलंगाना सरकार के निर्देश पर अधिकारी एक डेटाबेस तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

विदेश से लौटने पर दिया जाएगा प्रशिक्षण
तेलंगाना के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय प्रवासी इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मजदूर और नौकरानियों जैसी ब्लू-कॉलर नौकरियां करते हैं। ऐसे में सरकार उन्हें फिर से कौशल प्रशिक्षण के जरिए तेलंगाना में रोजगार के अवसर तलाशने का मौका देगी। यही नहीं सरकार श्रमिकों को स्वरोजगार के लिए ऋण और उद्यमशीलता सहायता भी उपलब्ध कराएगी। तेलंगाना सरकार नई नीति के तहत नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान के अलावा अन्य देशों से लौटने वाले तेलंगना के प्रवासी श्रमिकों को समायोजित किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य श्रम विभाग रोजगार सृजन के लिए राज्य-स्तरीय संसाधन केंद्र स्थापित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), प्रवासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन और संयुक्त राष्ट्र महिला के साथ मिलकर स्कीम पर कार्य हो रहा है। इसको लेकर 23 जनवरी को सभी हितधारकों की एक बैठक भी गई। जिसमें नीति के तहत श्रमिकों की आवश्यकता और इससे तेलंगाना को भविष्य में होने वाले लाभ पर भी चर्चा की गई।


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