खेती में सिंचाई के लिए सबसे अधिक बिजली की खपत होती है। लगातार सिंचाई के लिए बिजली की डिमांड बढ़ती ही जा रही है। यूपी सरकार ने लगातार बिजली की बढ़ी हुई डिमांड के समाधान के लिए नायाब पहल की है। इस पहल के तहत किसानों को बिजली के बिल से छुटकारा मिलेगा और बिजली की खपत भी सिंचाई में कम होगी।

दरसअल, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खेती में सिंचाई के लिए बिजली की डिमांड को खत्म करने के लिए क केंद्र सरकार की कुसुम योजना के तहत किसानों को अनुदान पर सोलार पंप दे रही है। इसके अलावा इसके अलावा यूपी में जिन किसानों के पा अपने निजी टृयूबेल हैं उन्हें अब सौर ऊर्जा से लैस करने की पहल की है।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया बिजली की बढ़ती डिमांड और खपत को कम करनके क लिए प्रदेश सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा के विकल्प को बढ़ाने का निर्णय लिया है। सोलर सब्सिडी और सौर्य ऊर्जा से चलने वाले ट्यूबेल दोनों ही विकल्प ग्रामीण इलाकों में कारगर साबित होगे।
मंत्री ने बताया प्रदेश सरकार ने इसके लिए अन्य राज्यों से सौर एवं पवन ऊर्जा खरीदना शुरू कर दिया है। 28 दिसंबर को 500 मेगावाट सौर ऊर्जा 2.67 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदने के लिए केंद्रीय एजेंसी SECI से अनुबंध किया है। पिछले अनुबंधों की तुलना में इस नए अनुबंध के अंतर्गत आधी क़ीमत पर बिजली मिलेगी। इससे पॉवर परचेजिंग कीमत में काफी कमी आएगी, साथ ही Power Cost भी कम होगी।
मंत्री ने बताया साल 2023 में 1400 मेगावाट Wind Energy की ख़रीद के लिए भी करार किया गया है. इसके साथ ही 3500 मेगावाट सोलार इनर्जी एवं 2000 मेगावाट हाइड्रो पॉवर ख़रीदने की प्रक्रिया भी शुरू की गयी है।
इसके अलावा राज्य के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पेश किए। जिसमें बताया गया कि बिजली के उत्पादन और आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर है। केंद्र सरकार ने विगत 19 दिसंबर को राज्य सभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आंकड़ें जारी किए थे। जिसके अनुसार 2023 में मांग के सापेक्ष 28,284 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करके देश में पहला स्थान हासिल किया है।


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