आ गई आपके जेब से जुड़ी जरूरी खबर, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया ये ऐलान, लोन EMI पर पड़ेगा असर

RBI MPC Meeting 2024 Highlights: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा है, जोकि 2018 से अब तक सबसे ज्यादा है. ये लगातार 8वां मौका है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. मौद्रिक समीक्षा कमिटी यानी MPC मीटिंग में शामिल 6 सदस्यों ने ये फैसला लिया, जिसके अध्यक्ष गवर्नर शक्तिकांत दास हैं.

उन्होंने बताया कि MPC के 6 में से 4 सदस्यों ने दरों में बदलाव न करने के पक्ष में वोट किया. इसीलिए सेंट्रल बैंक की MPC अकोमोडेटिव रुख वापस लेने के पक्ष में रहा. बता दें कि रिजर्व बैंक ने पिछली बार 2023 में फरवरी पॉलिसी के दौरान दरों में बढ़ोतरी की थी. इस साल अप्रैल में हुई RBI MPC मीटिंग में ब्याज दरों को जस का तस रखा गया था.

RBI की प्रमुख दरें

रेपो रेट: 6:50%
SDF: 6.25%
MSF: 6.75%
Bank rate: 6.75%

महंगाई और ग्रोथ पर फोकस रहेगी

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ब्याज दरों पर फैसला घरेलू स्थिति और आउटलुक के आधार पर लिया गया है. महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाने पर फोकस है. ग्लोबल ग्रोथ जारी रह सकता है. लेकिन खाद्य महंगाई में महंगाई जारी रह सकती है. इसलिए हमें खाद्य कीमतों में अनिश्चितता पर नजर बनाए रखने होगी. साथ ही कोर महंगाई पर निगरानी रखने की जरूरत है. इसके बावजूद FY25 में भी भारत का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि महंगाई दर को 4% तक लाने का टारगेट है. महंगाई में कमी लाने में MPC की अहम भूमिका है.

FY25 के लिए आर्थिक ग्रोथ पर RBI

रिजर्व बैंक ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर यानी FY25 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान को बढ़ाकर 7.2% कर दिया है, जोकि पहले 7% था. Q1FY25 GDP के लिए ग्रोथ अनुमान बदलकर 7.3% किया है, जोकि पहले 7.1% था. दूसरी तिमाही के लिए आर्थिक ग्रोथ रेट 6.9% से बढ़ाकर 7.2% किया है. Q3 के लिए GDP ग्रोथ रेट 7% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है. वहीं, Q4FY25 के लिए GDP ग्रोथ का लक्ष्य 7% से बढ़ाकर 7.2% कर दिया है.

RBI MPC Meeting 2024

FY25 में महंगाई दर के लिए अनुमान

केंद्रीय बैंक ने FY25 के लिए CPI इंफ्लेशन दर 4.5% रहने का अनुमान दिया है. पहली तिमाही में महंगाई दर घटने का अनुमान है, जोकि 4.9% रह सकती है. पहले 5% रहने का अनुमान था. Q2 में रिटेल महंगाई दर 3.8% रहने का अनुमान है, जोकि पहले 4% रहने की उम्मीद थी. दिसंबर तिमाही में महंगाई दर 4.6% पर रहने का अनुमान है. जबकि मार्च तिमाही में रिटेल महंगाई दर के अनुमान को 4.7% से घटाकर 4.5% कर दिया है.

अन्य सेंट्रल बैंक ने दरों में की कटौती

यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ECB ने 2019 के बाद पहली बार दरों में कटौती की है. इसके तहत बैंक ने दरों को 25 बेसिस पॉइंट्स घटा दिए हैं. दरों को 4% से घटाकर 3.75% कर दिया गया है. इससे पहले बैंक ऑफ कनाडा ने भी दरें घटाने का ऐलान किया. मार्च 2020 के बाद पहली बार सेंट्रल बैंक ने दरों में कटौती का ऐलान किया है. इसके तहत दरों को 5 फीसदी से घटाकर 4.75 फीसदी कर दिया गया है. यानी दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई है.

RBI क्यों घटता या बढ़ता है रेपो रेट?

बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का केंद्रीय बैंक यानी RBI भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है.

इससे अर्थव्यस्था में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश की जाती है. यानी रेपो रेट हाई होगा तो बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. इसके चलते बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरों पर लोन बांटेंगे. नतीजनत, इकोनॉमी में लिक्विटी का फ्लो गिर जाएगा. और जब मनी फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी.

इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है. रेपो रेट कम होने से बैंकों को कम ब्याज पर RBI से लोन मिलता है. इससे ग्राहकों को भी लोन ब्याज दरों पर सस्ते में मिलता है. नतीजनत, इकोनॉमी की रफ्तार को जोश मिलता है. इसे उदाहरण से समझते हैं....कोरोना महामारी के समय आर्थिक संकट में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाकर आर्थिक ग्रोथ में जोश भरने का काम किया.

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