तेलंगाना बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानि एमपीआई इंडेक्स में अग्रणी राज्य के तौर पर सामने आया है। प्रदेश में 2015-16 से 2022-23 के बीच बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एमपीआई इंडेक्स में प्रदेश 2015-16 में 13.18 फीसदी था जिसमे 2022-23 में 3.76 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। तेलंगाना में कुल 4.7 करोड़ की आबादी में से 17.67 लाख लोगों के बहुआयामी रूप से गरीब होने का अनुमान है।
वहीं आंध्र प्रदेश में 2015-16 में आंध्र प्रदेश में 11.77 फीसदी गरीबी थी। ऐसे में तेलंगाना में जहां 3.67 फीसदी का बदलाव हुआ तो आंध्र प्रदेश में यह 4.19 फीसदी का बदलाव हुआ है। इस लिस्ट में गोवा पहले पायदान पर है। यहां इसका स्कोर सबसे कम 0.37 फीसदी अंक है। जबकि केरल दूसरे पायदान पर है यहां 0.48 फीसदी, तमिलनाडु 1.43 फीसदी, सिक्किम 2.10 फीसदी, जम्मू कश्मीर 2.81 फीसदी, दिल्ली 2.97 फीसदी है।

तेलंगाना ने इस लिस्ट में सातवां स्थान प्राप्त किया है। 2019-21 की तुलना में प्रदेश की रैंकिंग एक अंक अधिक है। उस वक्त प्रदेश एमपीआई इंडेक्स में 5.88 फीसदी अंक के साथ आठवे पायदान पर था। केरल और तमिलनाडु के बाद तेलंगाना दक्षिण भारत के राज्यों में तीसरे पायदान पर है। वहीं सबसे तेजी से बहुआयामी गरीबी रेखा से बाहर आने वाले राज्यों की बाद करें तो उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है, इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान हैं। बिहार, झारखंड, मेघायल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश देश में पांच सबसे गरीब राज्यों की लिस्ट में शामिल है। यहां सबसे अधिक संख्या में लोग बहुआयामी गरीबी रेखा में आते हैं।


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