दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में दिए अपने एक हलफनामें में स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च का ब्यौरा दिया है। इसके साथ अदालत को कोर्ट ने बताया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं आएगी कि कोई भी अस्पताल किसी मरीज के एडमिट करने से मना कर सके।
दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि अस्पतालों में बेड की उपलब्धता को लेकर एक पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है, जिसमें हॉस्पिटल में बेड की उपलब्धता की स्थिति अपडेट रहेगी। इसके जरिए मरीज या परिजन जिस अस्पताल में एडमिट कराना चाहते हैं, वहां इलाज की उपलब्धता की अपडेट स्थिति का पता लगा सकते हैं।

दरअसल, दिल्ली सरकार ने उस मामले का संज्ञान लिया जहां चार अस्पतालों में इलाज से इनकार करने के बाद एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। मामले कोर्ट को जवाब देते हुए दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामे में 2017-18 से शहर के चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर ₹21,436.8 करोड़ का खर्च दिखाया गया है।
दिल्ली के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने गुरुवार को एक हलफनामे में अदालत को बताया कि 2021 से चालू इंदिरा गांधी अस्पताल सहित इन 11 अस्पतालों पर अब तक कुल खर्च ₹2,691.31 करोड़ है। विभाग ने अदालत से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कुल 10,073 स्वीकृत बिस्तरों वाले ग्यारह दिल्ली सरकार के अस्पताल शहर के विभिन्न हिस्सों में पूरा होने के विभिन्न चरणों में हैं, इनमें से दो परियोजनाएं मार्च तक पूरी होने की संभावना है।
चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर बजट खर्च के बारे में अदालत के सवाल पर, सरकार ने कहा कि उसने वित्तीय वर्ष 2017-18 से अस्पतालों पर ₹21,436.80 करोड़ खर्च किए हैं।


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