देश में चुनावी पारा अपने चरम पर है। चुनावी मौसम में आजकल विरासत टैक्स चर्चा में है। जिस तरह से इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने विरासत टैक्स की बात कही थी, उसके बाद से यह मुद्दा लगातार चर्चा में है।
एक तरफ जहां कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा विरासत टैक्स की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते वर्ष एक ऐसा फैसला लिया था, जिसमे विरासत टैक्स तो दूर बल्कि पैतृक संपत्ति की रजिस्ट्री ट्रांसफर कराने में बड़ी छूट की शुरुआत की गई थी।

उत्तर प्रदेश में 18 जून 2022 को यह खास प्रावधान लागू हो चुका है। जिसके तहत अगर दाता अचल संपत्ति को परिवार के सदस्यों में बांटता है तो इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 5 हजार रुपए में कराया जा सकता है। योगी सरकार के इस फैसले की बड़ी वजह मुकदमेबाजी को कम करना है।
जब अचल संपत्ति को परिवार सदस्यों जैसे बेटे, बेटी, पिता, मां, पति, पत्नी, बहू आदि को ट्रांसफर की जाती है तो इसकी सिर्फ 5 हजार रुपए में रजिस्ट्री कराई जा सकती है। वहीं सगे भाई की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी, सगी बहन, दामाद आदि को भी सिर्फ 5 हजार रुपए में संपत्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है।
बता दें कि इससे पहले प्रदेश में एक करोड़ रुपए तक की संपत्ति को ट्रांसफर करने पर पांच लाख रुपए तक का स्टांप शुल्क लगता था। लेकिन योगी सरकार ने संपत्ति उपहार में देने पर अधिकतम पांच हजार रुपए तक का शुल्क तय किया है। ऐसे में सरकार के फैसले के बाद लोगों को बड़ी राहत मिली है और उन्हें 5 लाख की बजाए सिर्फ पांच हजार रुपए में संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराने का मौका मिलता है।
सरकार के नए प्रावधान के तहत यह नियम सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को उपहार में दी गई आवासीय और कृषि संपत्तियां शामिल हैं। इसका लाभ फर्म, कंपनी, संस्थान आदि को नहीं मिलेगा। सरकार की ओर से किए गए इस बदलाव से प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिली है और लोग आसानी से अपनी संपत्ति को ट्रांसफर करा रहे हैं।


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