उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में पिछले सात साल में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। एक तरफ जहां प्रदेश में कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों में तेजी आ रही है, पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है तो दूसरी तरफ प्रदेश में युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिल रहा है।
सरकार की लगातार मुहिम का असर स्पष्ट तौर पर पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है। प्रदेश में औद्योगिकीकरण के जरिए रोजगार सृजन का प्रयास रंग ला रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के बीच की जो रिपोर्ट सामने आई थी, उसमे भी इस बात की तस्दीक की गई है कि उत्तर प्रदेश कई अहम संकेतों को पूरा कर रहा है। इस रिपोर्ट को मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन की ओर से जारी किया गया था।

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में उद्योगों की संख्या, रोजगार, आउटपुट वैल्यू में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। प्रदेश में जो नई कंपनियां सक्रिय हुई हैं वो उच्चतम विकास दर के साथ प्रदेश में आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में 2016 से 2020 के बीच उद्योगों की संख्या में 1.4 फीसदी की दर से हर वर्ष बढ़ा है। 2016-2020 के बीच रोजगार दर में 4.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। भारत में रोजगार सृजन में उत्तर प्रदेश की ओर से 6.6 फीसदी की हिस्सेदारी बढ़कर अब 6.8 फीसदी हो गई है
उत्तर प्रदेश में उद्योगों में इजाफा, निवेश में बढ़ोत्तरी और रोजगार सृजन के पीछे की असल वजह प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था और योगी सरकार के कुछ बड़े नीतिगत फैसले हैं। प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में निवेश को सरल बनाया गया है। उद्यमियों को एक ही पोर्टल के जरिए ईज ऑफ बिजनेस का लाभ दिया जा रहा है ताकि उन्हें प्रदेश में निवेश के लिए सरकारी औपचारिकताओं में ना उलझना पड़े। इसके साथ ही प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था ने उद्योगों की बढ़ोत्तरी में बड़ा योगदान दिया है।
योगी सरकार की ओर से जो इस वित्त वर्ष का बजट पेश किया गया है उसमे नई स्कीमों के लिए 32 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटन किया गया है। प्रदेश का कुल बजट 6.90 लाख करोड़ का है, जोकि इस बात को दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।


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