राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। तेज बारिश और जल जमाव के चलते मौसमी बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया के संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि अधिक जल जमाव वाले इलाकों में सरकार ने खास सावधानी बरतने के साथ स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर एक खास प्लान तैयार किया गया है, जिसे प तीजे क से काम करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।
दिल्ली सरकार ने बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ कुछ जानलेवा मौसमी बीमारियों से लोगों को जागरूक करने और संक्रमण को रोकने के लिए 40 लाख पंफ्लेट लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए छपवाए गए हैं। इसके अलावा आशा (ASHA) वर्करों को बचाव के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया है।

आशा वर्कर अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचने के उपायों की जानकारी देंगे। इसके अलावा बचाव के लिए अन्य तरीके भी खोजे जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाने वाले सैंपलों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जिससे ये बीमारियां रोकी जा सकें।
केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इसको लेकर उच्च अधियाकिरियों के साथ एक बैठक की। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव को अगली बैठक में पुलिस और छावनी बोर्ड के अधिकारियों को बुलाने के निर्देश दिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कि नगर निगम के सभी स्कूलों में बच्चों को डेंगू होमवर्क कार्ड दिए गए हैं। इसमें बच्चे हर सप्ताह घर के हर कोने में गमले में पानी इकट्ठा होने की पुष्टि करेंगे। बच्चे एक कार्ड बनाकर स्कूल में जमा करेंगे। साथ ही पूरी दिल्ली में ऐसे क्षेत्रों की जांच की जा रही है जहां डेंगू और मलेरिया के मच्छर फैलने की संभावना है। वहां दवा दी जाती है।
वहीं डीयूएसआईबी विभाग को मंत्री ने कहा कि जेजे क्लस्टर में उचित जांच की जाए। पानी ठहरने वाली जगह को नियमित रूप से खोजें, निकासी को नियंत्रित करें, दवा छिड़कें और मच्छरों की वृद्धि को रोकने के लिए हर संभव उपाय करें। स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज को बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि सभी ठेकेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्षेत्र में पानी जमा न होने दें।


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