MP News: मध्य प्रदेश में मोहन यादव ने इसी साल फरवरी में एक अनोखे कदम का ऐलान किया था। इसके तहत राज्य सरकार ने तय किया था कि कक्षा एक से लेकर बारवीं तक में पढ़ने वाले सरकारी या निजी स्कूलों के बच्चों को एक दिन बिना बैग के स्कूल जाने का (बैगलेस स्कूल) का मौका दिया जाएगा।
मतलब, हफ्ते में एक दिन स्कूली बच्चों को बना बैग के स्कूल जाना है। यह व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू की गई है। मोहन यादव सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि बच्चे स्कूल को चिंता वाली जगह न समझें और मस्ती के लिए स्कूल जाएं। बच्चे स्कूलों को ऐसे स्थान के रूप में महसूस करें, जहां जाना उन्हें अच्छा लगे और जहां उन्हें आनंद का अनुभव हो।

हफ्ते में एक दिन बिना बैग के स्कूल
स्कूली बच्चों के कंधों से बैग का बोझ कम करने के लिए एमपी सरकार ने सिर्फ एक दिन बिना बैग के स्कूल जाने का ही इंतजाम नहीं किया है। राज्य सरकार ने कक्षा 1 से लेकर 12वीं के बच्चों तक के लिए स्कूली बैक का अधिकतम वजन भी तय कर दिया है और सभी स्कूलों को इस निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा है।

बच्चों के बैग का वजन निर्धारित होना बड़ी राहत
मोहन यादव सरकार ने यह भी तय किया है कि छोटे बच्चों के बैग का अधिकतम वजन अब 2.2 किलो से ज्यादा नहीं होगा। वहीं बड़े बच्चों को भी 4.5 किलो से ज्यादा का स्कूली बैग ढोने की आवश्यकता नहीं है।
यह कदम कोई संवेदनशील सरकार ही उठा सकती है। मासूम बच्चों के कंधों पर बिना वजह वजन लादकर उनका ज्यादा फायदा नहीं होता, उससे ज्यादा उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा दिया जाता है।

बच्चों में स्कूल की चिंता दूर करने की बड़ी पहल
दरअसल, राज्य सरकार यह पहल कर रही है कि बच्चों से बैग के बोझ को कम करके, उन्हें और ज्यादा नई-नई चीजें सीखने का अवसर देने के साथ खेलों के भी अधिकतर अवसर उपलब्ध करवाया जाएं। बच्चे इस चिंता से धीरे-धीरे मुक्त हो जाएं कि उनका स्कूल कोई बोझिल स्थान है।

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने की पहल
राज्य सरकार की कोशिश है कि बच्चों को स्कूल में ऐसा माहौल दिया जाए, जहां वे खुशी-खुशी आएं और सभी तरह की गतविधियों में दिलचस्पी लें। मोहन यादव सरकार की यह पहल महज बच्चों को स्कूल के भार से मुक्त करना नहीं है, बल्कि देश के लिए ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो बहुमुखी प्रतिभा का धनी हो, जो देश के विकास में योगदान देने लायक बन सके।

राज्य सरकार ने इस नीति के पालन के लिए चालू सत्र से ही सभी सरकारी और निजी स्कूलों को दिशा-निर्देशों के सख्ती से पालन करने को कहा है।


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