मध्य प्रदेश सरकार बेहतर से बेहतर शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सजग और संवेदनशील है, इसकी झलक नए मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहली ही कैबिनेट मीटिंग में देखने को मिल चुकी है।
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस' स्थापित करने की फैसला किया है। अगर पहली ही कैबिनेट में इतना बड़ा कदम उठाया गया है तो इससे स्पष्ट है कि यह लंबे समय तक मंथन के बाद बहुत ही सूझ-बूझ के साथ लिया गया निर्णय है।

उच्च शिक्षा को और बुलंदियों पर ले जाने की पहल
सीएम मोहन यादव पिछली सरकार में भी शिक्षा विभाग की विरासत संभाल रहे थे और उनकी सरकार का ताजा फैसला उच्च शिक्षा को और बेहतर करने के उनके लक्ष्य की ही अनुपम परिणति है।
राज्य सरकार ने यह कदम बहुत ही दूरगामी उद्देश्य को ध्यान में रखकर उठाया है। मध्य प्रदेश में इस समय कुल 570 शासकीय कॉलेज हैं। इनमें से हर जिले में एक कॉलेज को 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस' के रूप में विकसित करने पर 460 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए मिशन मोड में काम कर रहे हैं सीएम
मुख्यमंत्री मोहन यादव का इरादा साफ है। वह उच्च शिक्षा को प्रदेश में नई बुलंदियों तक ले जाना चाहते हैं, जिसके लिए वह लंबे वक्त से मिशन मोड में काम कर रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन पर रहा है जोर
सीएम यादव प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन के महत्त्व को समझने वाली शख्सियत के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें शिक्षा मंत्री रहते हुए राज्य में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू करने का भी अनुभव है।

यूजीसी भी कर चुका है सराहना
बतौर शिक्षा मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में जो फैसले लिए हैं, उसकी आज भी सराहना होती है। राज्य में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जो स्नातक पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं, उसकी यूजीसी तक सराहना कर चुका है। उनके कार्यकाल में कौशल विकास पर भी फोकस रहा है, तो सामान्य शिक्षा को भी अहमियत मिली है।
यही वजह है कि राज्य के हर जिले में 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस' बनाने के फैसले से लोगों को काफी उम्मीदें हैं और प्रदेश में शिक्षा के स्तर में और सुधार का विश्वास जगा है।

शिक्षा के हर दृष्टिकोण को मिली है अहमियत
सीएम मोहन यादव राज्य में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करवाने में अपने योगदान के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते हुए सामान्य शिक्षा पर तो ध्यान दिया ही, पर्यावरण, योग, व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण और महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप पर भी पूरा फोकस रखा।

इन्हीं के कार्यकल में एमपी में कॉलेज की शिक्षा में ही जैविक खेती और बागवानी की पढ़ाई को भी वैकल्पिक विषयों के रूप में शामिल किया गया है। इसलिए, उम्मीद है कि प्राचीन काल से मध्य प्रदेश जिस तरह से शिक्षा का केंद्र रहा है, उसमें आने वाले वर्षों में और नए अध्याय जुड़ने की पूरी संभावना है।


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