MP News: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जनता के हित में लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिससे गरीबों की जिंदगी आसान हो रही है और समाज के दुश्मनों के खिलाफ लगाम कसे जा रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने भोपाल के भू-माफियाओं के कब्जे से करोड़ों रुपये की जमीन मुक्त करा ली है।
सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करना भू-माफियाओं का पुराना हथकंडा रहा है। लेकिन, एमपी के सीएम मोहन यादव के कार्यकाल में ऐसे किसी समाज के दुश्मनों की खैर नहीं है। इसी कड़ी में राज्य शासन ने भू-माफिया के अतिक्रमण पर बुलडोजर ऐक्शन करके आम लोगों में नए सिरे से विश्वास बहाल करने का काम किया है।

करोड़ रुपए की सरकारी जमीन भू-माफिया के कब्जे से मुक्त
घटना राजधानी भोपाल इलाके की ही है, जहां एमपी शासन ने 0.7 हेक्टेयर जमीन माफियाओं के कब्जे से वापस ले ली है। यहां अतिक्रमणकारियों ने सरकारी जमीन पर न सिर्फ अवैध कब्जा कर रखा था, बल्कि वहां गैर-कानूनी निर्माण को भी अंजाम देने लगे थे।

15.50 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन पर था अवैध कब्जा
मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार की सख्ती से 15.50 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन मुक्त करवाई जा सकी है। इस ऐक्शन के लिए पिपलिया पेंदे खां में तीन जेसीबी की सेवाएं बुलडोजर ऐक्शन के लिए ली गईं। इस सरकारी जमीन पर जिंसी चौराहे के शहजाद और भैया भाई और पिपलिया पेंदे खां के जहीर अहमद ने गैर-कानूनी कब्जा कर रखा था।

बुलडोजर ऐक्शन से थर्राए भोपाल के भू-माफिया
ये अतिक्रमणकारी इतने दुस्साहसी थे कि उन्होंने सरकारी जमीन होने के बावजूद उसपर कॉलोनियां बसाने की पुख्ता तैयारी कर ली थी और निर्माण कार्यों को भी अंजाम दिया जाने लगा था। जैसे ही राज्य शासन को इसकी सूचना मिली, उसने बड़ी ही तत्परता दिखाई और बिना कोई वक्त गंवाए सारे अवैध निर्माण गिरा दिए और सरकारी जमीन को शासन के कब्जे में ले लिया।

साजिश के तहत करते हैं सरकारी जमीन पर कब्जा
दिक्कत ये होती है कि जब कभी भू-माफिया किसी सरकारी जमीन पर कब्जा शुरू करते हैं तो आम लोगों को उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने की वजह से उसपर कोई ध्यान नहीं दे पाता।

संवेदनशील सरकार की दिखाई पहचान
अगर आम लोगों को इसकी भनक लगेगी तो वह प्रशासन को फौरन सूचना दे सकते हैं। लेकिन, भूमाफिया इसी का फायदा उठाते हैं और आम जनता के साथ-साथ सरकार को भी झांसा देने की कोशिश करते हैं।
लेकिन, जब राज्य में सरकार संवेदनशील होती है और शासन को ऐसे समाज-विरोधी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की खुली छूट दी होती है तो भू-माफियाओं का वही अंजाम होता है, जैसा इस मामले में हुआ है।


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