Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने जिस तरह राज्य को नई दिशा देने की पहल शुरू की है, उससे लगता है कि आने वाले वर्षों में यह प्रदेश धार्मिक पर्यटन के हब के रूप में उभर सकता है। मोहन यादव सरकार की ओर से ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिसका मकसद मध्य प्रदेश में वैसी धार्मिक धरोहरों का उत्थान करना है, जिससे देश-विदेश के लोगों को यहां तीर्थयात्री बनकर आने का मौका मिले।
आज पूरे देश-विदेश में अयोध्या में भगवान राम की पवित्र जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की चर्चा हो रही है। जब भी भगवान राम और माता सीता की बात आती है तो उनसे जुड़े पवित्र स्थलों के लिए मध्य प्रदेश की चर्चा होनी भी स्वाभाविक है।

करीला धाम की किस्मत चमकने के मिल रहे हैं संकेत
एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश के इसी गौरवमयी अति-प्राचीन इतिहास को उभारने और आगे बढ़ाने की हर मुमकिन में कोशिशों में जुटे हैं। यह तब भी देखने को मिला जब सीएम डॉक्टर यादव अशोकनगर में रंगपंचमी के अवसर पर पहुंचे।

माता जानकी मंदिर में रंग पंचमी पर जुटते हैं लाखों श्रद्धालु
इस जिले की जसैया पंचायत में करीला पहाड़ी पर माता जानकी और महर्षि वाल्मीकिजी का आश्रम है। यह पवित्र स्थल अब रंगपंचमी पर विशाल मेले के लिए जाना जाता है, जहां पूरे देश से लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। कहा जाता है कि माता जानकी ने इसी आश्रम में लव और कुश को जन्म दिया था।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर दिया है बड़ा इशारा
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सिर्फ माता जानकी और लव-कुश के दर्शन और पूजा-अर्चना की, बल्कि करीला धाम के उज्ज्वल भविष्य को लेकर एक बहुत ही बड़ा इशारा भी कर दिया। तथ्य यह है कि आज अयोध्या से लेकर उज्जैन तक, काशी से लेकर अन्य पौराणिक धर्म स्थलों तक के पुनरुत्थान का रास्ता साफ हो रहा है।

इस मौके पर सीएम यादव ने जो संकेत दिए हैं, उससे जाहिर है कि आने वाले दिनों में करीला धाम का पुररुत्थान भी निश्चित है। जाहिर है कि आचार संहिता की वजह से अभी मुख्यमंत्री के हाथ बंधे हुए हैं। लेकिन, उनके संकेतों को समझें तो करीला भी एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के तौर पर विकसित होने को तैयार है।

यूं समझ लें कि अब कुछ ही महीनों की बात है। उसके बाद करीला धाम के कायाकल्प को लेकर राज्य सरकार कोई बड़ी घोषणा कर सकती है। इससे न सिर्फ इस क्षेत्र का, बल्कि पूरे राज्य का कल्याण निश्चित है। इसके धार्मिक पर्यटन के मानचित्र में एक और और स्थल जुड़ने को तैयार होगा। यह मध्य प्रदेश की समृद्धि में भी सहायक बन सकता है।


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