मध्य प्रदेश सरकार ने राजस्थान और केंद्र सरकार के साथ मिलकर एक ऐसा कदम उठाया है कि दोनों राज्यों के 26 जिलों के वारे-न्यारे होने तय हैं। तीनों ने मिलकर करीब दो दशकों से लंबित पार्वती-काली-सिंध-चंबल-पूर्वी राजस्थान लिंक नगर परियोजना पर त्रिपक्षीय समझौता किया है।
75,000 करोड़ रुपए की इस परियोजना का लाभ मध्य प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के 13 जिलों को मिलना तय है। इस निर्णय से न सिर्फ पानी के अभाव वाले इलाकों को फायदा पहुंचेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही साथ राज्य में पर्यटन की संभावनाएं और भी बेहतर होंगी।

एमपी के 13 जिलों में बढ़ेगी पानी की उपलब्धता
इस समझौते से एमपी के जिन सूखाग्रस्त जिलों में पानी की उपलब्धता बढ़नी तय है, उनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड,गुना,शिपपुरी और श्योपुर शामिल हैं। ये सारे जिले सूखाग्रस्त क्षेत्र में गिने जाते हैं। यहां सिंचाई के लिए भी ज्यादा पानी मिलेगा और पीने के लिए पानी की भी उपलब्धता बढ़ेगी।

उद्योगों को भी मिलेगा लाभ
यही नहीं, इस फैसले से इंदौर, धार, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ जिलों की भी संभावनाएं और बेहतर होंगी, जो उद्योगों के लिए जाने जाते हैं।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए वरदान
खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि इस परियोजना की मदद से मालवा और चंबल इलाकों में सिंचित क्षेत्रों में 3 लाख हेक्टेयर की वृद्धि होगी।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए यह परियोजना वरदान साबित हो सकती है। इसकी वजह से धार्मिक और अन्य पर्यटन केंद्रों को भी विकसित करने में सहायता मिलेगी।

एमपी के 1.5 करोड़ लोगों का कल्याण
राज्य सरकार के मुताबिक यह परियोजना 5 वर्षों के अंदर पूरी हो जाएगी, जिसपर अभी के हिसाब से लगभग 75,000 करोड़ रुपए की लागत आएगी। अगर आबादी के हिसाब से सोचें तो प्रदेश के 1.5 करोड़ लोग इसकी वजह से सीधे लाभांवित होने जा रहे हैं।
पूर्वी राजस्थान का भी कल्याण निश्चित
अगर पड़ोसी राज्य राजस्थान की भी सोचें तो कुल मिलाकर दोनों प्रदेशों के सिंचित क्षेत्रों में 5.6 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी होने जा रही है। मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्रों के 13 जिलों के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के भी 13 जिलों का कल्याण होना तय है।
इस परियोजना के पूरा होने पर दोनों राज्यों की जनता को सिंचाई की सुविधा के साथ-साथ पेयजल की भी समस्या दूर होगी और उद्योगों का भी कल्याण होना निश्चित है।

इतनी बड़ी परियोजना पर मुहर लगना इसी वजह से संभव हो पाया है, क्योंकि केंद्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान तीनों जगहों पर जनहित को प्राथमिकता देने वाली सरकारें हैं।
इसकी अहमियत का अंदाजा इसी से लग सकता है कि नई दिल्ली में रविवार को जब एमओयू पर हस्ताक्षर हो रहे थे, तो केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, एमपी के सीएम मोहन यादव और राजस्थान में उनके समकक्ष भजन लाल शर्मा खुद भी मौजूद थे।
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