हरियाणा सरकार ने राज्य के स्कूली बच्चों के जीवन को देश की संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के लिए बहुत बड़ी पहल की है। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से घोषणा की गई है कि इस साल के स्कूल पाठ्यक्रम में पवित्र गीता के 54 श्लोकों को शामिल किया जाएगा।
एक सरकार जब बच्चों में मौजूद उनकी बहुमखी प्रतिभा को निखारने के बारे में सोचती है तो वह ऐसी शिक्षा का इंतजाम करती है, जो उसके समग्र विकास में सहायक बन सके। हरियाणा सरकार का यह कदम उसी दूरदृष्टि वाले विचारों से प्रेरित लग रहा है।

हरियाणा के स्कूली बच्चे सीखेंगे 54 गीता श्लोक
खास बात ये है कि हरियाणा के सीएम खट्टर ने कहा है कि सिर्फ 54 गीता श्लोकों तक सीमित रहने की बात नहीं है। भविष्य में और श्लोकों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना भी है।

देश को शिक्षित और सुसंस्कृत नागरिक की आवश्यकता
देश के लिए एक शिक्षित नागरिक की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही ज्यादा एक सुसंस्कृत नागरिक की भी जरूरत है। क्योंकि, बिना मर्यादा के ज्ञान भी कभी-कभी विपरीत प्रभाव डालने लगता है।
आधुनिक शिक्षा और प्राचीन संस्कृति की जुगलबंदी
इसलिए अत्याधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अपनी मूल संस्कृति और पारंपरिक जीवन पर आधारित आचार-विचार से अवगत कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है; और खट्टर सरकार ने यह कदम उठाकर उसी दिशा में एक नया इतिहास रचने की कोशिश की है।

सोने पे सुहागा ये कि मुख्यमंत्री खट्टर ने यह घोषणा कुरक्षेत्र में आयोजित 'विश्व गीता पाठ' के शुभ अवसर पर की है, जहां लोग 18,000 छात्रों की ओर से किए गए 18 गीता श्लोकों के पाठ के गवाह बने हैं।
हमारे जीवन-पद्धति का आधार है गीता
भारतीयता के नजरिए से गीता महज एक महाकाव्य नहीं है, यह हमारे जीवन-पद्धति का आधार है। इसमें संपूर्ण मानव जीवन का सार है। यही वजह कि सीएम खट्टर ने छात्रों से कहा है कि अपनी जेब में गीता की एक पुस्तक लेकर चलें।

सरल भावना, व्यापक उद्देश्य
देश के भविष्य के प्रति मुख्यमंत्री की भावना जितनी ही सरल है, उनका उद्देश्य उतना ही व्यापक है। उनकी साफ सोच है कि अगर बचपन से ही बच्चों में ऐसे संस्कार जगा दिए जाएं तो वह अत्याधुनिक शिक्षा को और भी बेहतर तरीके से आत्मसात कर सकेंगे और उनका समाज, देश, दुनिया और सबसे बढ़कर मानवता के प्रति दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रहेगा।

दरअसल, स्कूली पाठ्यक्रम में गीता और अन्य महाकाव्यों को शामिल करने का काम पहले से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत चल रहा है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में जो कदम उठाया है, उससे इसकी व्यापकता और बढ़ने की संभावना है।
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