हरियाणा सरकार ने पिछले 9 वर्षों से ज्यादा समय में किसानों की आय बढ़ाने के लिए तमाम कोशिशें की हैं और एक से बढ़कर एक योजनाएं चलाई हैं, जिसका मकसद सिर्फ अन्नदाताओं का कल्याण है।
हरियाणा सरकार जहां हर समय किसानों के हितों के लिए खड़ी रही है, वहीं इस बात का भी खास ख्याल रखा है कि खेती के तरीकों में भी सुधार होती रहे, जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़े, मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बेहतर हो, ताकि किसान एक ही भूमि से ज्यादा से ज्यादा फसलों का उत्पादन कर सकें।

फसलों के नुकसान की पीड़ा किसानों से बेहतर कौन समझ सकता है
हरियाणा के किसान जितने मेहनती हैं, वह एक-एक फसल उगाने के लिए जितना संघर्ष करते हैं, उनके श्रम पर तब पानी फिर जाता है, जब मौसम की मार की वजह से उनकी खेती चौपट हो जाती है।
खेतों में लहलहाते हुए फसलों की तबाही की पीड़ा क्या होती है, उसे एक अन्नदाता ही समझ सकता है। किसान फसलों के लिए अपना तन-मन-धन सभी समर्पित करने के लिए तैयार रहते हैं।

हरियाणा सरकार, अन्नदाताओं की सरकार
प्रदेश के किसानों को ऐसी अप्रत्याशित प्राकृतिक मार से बचाने के लिए हरियाणा सरकार दो विशेष योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री भावांतर भरपाई योजना और बागवानी बीमा योजना।
ये योजनाएं किसानों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान से बचाती हैं, बल्कि अगली फसल की तैयारी के लिए उनका मनोबल बढ़ाने का भी काम करती हैं।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए समर्पित सरकार
हरियाणा सरकार का इरादा साफ है। किसानों की आमदनी बढ़े और फसलों का विविधीकरण सुनिश्चित हो सके। ये योजनाएं राज्य के अन्नदाताओं को उत्पदान से संबंधित सभी तरह के जोखिमों से मुक्त कर देती हैं।
फसलों के नुकसान में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी
मसलन, मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत सब्जियों, फलों और मसालों की खेती कवर होती है। फसल चाहे ओलावृष्टि की वजह से खराब हो या फिर ज्यादा तापमान या पाला की वजह से या फिर किसी वजह से जल भराव होने या आंधी-तूफान और आग लगने की ही घटनाएं क्यों न हो जाएं, किसानों को इसका लाभ मिलना तय है।

कम प्रीमियम, ज्यादा मुआवजा
सबसे बड़ी बात ये है कि इस बीमा के लिए प्रीमियम की रकम महज 2.5% निर्धारित की गई है। मतलब, सब्जियों और मसाले की खेती पर प्रति एकड़ 750 रुपए प्रीमियम निर्धारित है। लेकिन, अधिकतम मुआवजा 30,000 रुपए दिया जाता है।
वहीं फलों की खेती के लिए प्रति एकड़ 1,000 रुपए के प्रीमियम पर 40,000 रुपए तक का मुआवजा दिया जाता है। 23 तरह की सब्जियों, 21 तरह के फल और 2 तरह के मसाले इस बीमा योजना के दायरे में आते हैं।

इन फसलों के नुकसान पर मिलता है लाभ
सब्जियों में अरबी,भिन्डी,करेला,लौकी,बैंगन,पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, गोभी, मिर्च, खीरा, ककड़ी, खरबू,प्याज, मटर, आलू, कद्दू, मूली, तोरइ, टिंडा, जुकिनी, टमाटर, तरबूज शामिल किए गए हैं।
वहीं फलों में आंवला, बेर, चीकू, खजूर, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, अंगूर, अमरूद, जामुन, किन्नू, लैमन, नींबू, लीची, मालटा, संतरा, आम, आड़ू, नाशपाती, आलु बुखारा, अनार, स्ट्रॉबेरी आते हैं। मसालों में हल्दी और लहसुन को शामिल किया गया है।
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