हरियाणा सरकार पिछले करीब 10 वर्षों से लगातार कृषि और किसानों के कल्याण वाली योजनाओं को बढ़ा दे रही है। मकसद एक है किसानों की आमदनी बढ़ाना, जिससे वह खुद भी प्रगति करें और प्रदेश और देश की तरक्की में भी योगदान दे सकें।
अब हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने राज्य में खेती और किसानों की बेहतरी के लिए पायलट प्रोजेक्ट आधारित उन्नति सुनिश्चित करना तय किया है।

कृषि और किसानों के हित के प्रति समर्पित सरकार
इसके तहत खट्टर सरकार हरियाणा में फसलों में विविधता लाने, सूक्ष्म-सिंचाई योजनाओं को बढ़ावा देने, पशुधन के विकास और कृषि एवं किसानों से जुड़ी अन्य संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने जा रही है। राज्य के अन्नदाताओं के घरों में समृद्धि आएगी तो समाज का भी कल्याण होता जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण को नई योजनाएं तैयार करने को कहा है, जिसमें ऑर्गेनिक खेती, प्राकृतिक खेती और सहकारी खेती को बढ़ावा देना शामिल है।

छोटे और सीमांत किसानों के हितों का विशेष ख्याल
सीएम खट्टर ने साफ तौर पर यह बात रखी है कि ऐसी नई कृषि व्यवस्था बनाई जाए जिसमें पारंपरिक खेती को भी साथ लेकर चलने का इंतजाम हो। लक्ष्य ये है कि विशेष तौर पर छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके।

पशुधन के विकास पर भी दे रही है जोर
मुख्यमंत्री के मुताबिक पशुधन के क्षेत्र में अभी भी तमाम संभावनाएं मौजूद हैं, जो अन्नदाताओं की आमदनी को और बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने जमीन के छोटे टुकड़ों पर खेती की चुनौतियों से निपटने और फूड-प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।

इसके लिए राज्य सरकार ने हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण से संबंधित विभागों के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है, ताकि प्रदेश के अन्नदाताओं को इजरायल की तर्ज पर सहकारी कृषि तकनीक अपनाने की ओर भी प्रेरित किया जा सके।

माइक्रो-इरिगेशन को भी खट्टर सरकार दे रही है बढ़ावा
तथ्य यह भी है कि भूमिगत जलस्तर में खतरनाक रूप से गिरावट आती जा रही है। हरियाणा सरकार इसको लेकर भी चिंतित है। इसी वजह से वह माइक्रो-इरिगेशन प्रोजेक्ट को भी बढ़ावा दे रही है। खासकर यह उन इलाकों के लिए जरूरी है, जहां भूमिगत जलस्तर 30 मीटर है।
राज्य सरकार सौर-ऊर्जा आधिरित बोरवेल लगाने के लिए भी किसानों को प्रेरित कर रही है, जिसके लिए वह सब्सिडी उपलब्ध करवाने के लिए भी तैयार है। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि खट्टर सरकार किसानों की पानी और बिजली पर लगने वाली लागत भी उठाने के लिए तैयार है।
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