हरियाणा सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मिडडे मील कुक और हेल्परों की सैलरी दोगुनी कर दी है। मनोहर लाल खट्टर सरकार के इस फैसले से राज्य के हजारों परिवारों की जीवन में नई खुशियां आने का मौका मिला है।
खट्टर सरकार ने मिडडे मील वर्करों की सैलरी बढ़ाने का तो फैसला किया ही है, साथ ही साथ बच्चों को जो स्कूल में भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है, उसका दायरा भी बढ़ा दिया है। इसमें कुछ और पौष्टिक व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं।

मिडडे मील में पौष्टिक भोजन का विस्तार
हरियाणा सरकार ने इस बात का ख्याल रखा है कि बच्चों को जो भी भोजन मिले, वह उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हो, ताकि मध्याह्न भोजन के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी न हो, यह देश को सेहतमंद नागरिक देने में भी सहायक बने।

मिडडे मील कुक और हेल्परों की सैलरी दोगुनी कर दी
हरियाणा सरकार पहले मिडडे मील कुक और हेल्परों को 3,500 रुपए सैलरी के रूप में देती रही है। इसे बढ़ाकर अब सीधे 7,000 रुपए महीने करने का फैसला लिया गया है। खास बात ये है कि इसका अधिकतर हिस्सा हरियाणा सरकार अपनी ओर से ही उपलब्ध करवाएगी।

30,000 परिवारों के लिए अच्छी खबर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 30,000 लोग स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन से संबंधित कार्यों से जुड़े हुए हैं। इस तरह से एक साथ लगभग 30,000 परिवारों को मुस्कुराने की वजह मिल गई है।
पिछले साल से बच्चों को हफ्ते में तीन बार दिया जा रहा है दूध
राज्य के स्कूलों में अभी बच्चों को मिडडे मील के तौर पर वेजिटेबल पुलाव, दाल चावल और दलिया जैसी चीजें परोसी जाती हैं। खट्टर सरकार ने पिछले साल इसमें प्रत्येक स्कूली बच्चों को हफ्ते में तीन बार 200 एमएल दूध भी देना शुरू किया था।

मिडडे मील के मेन्यू में पौष्टिक और स्वादिष्ट खाने का विस्तार
लेकिन, अब इसके मेन्यू में और विस्तार कर दिया गया है। अब स्कूली बच्चों को मिडडे मील के तौर पर पराठा-दही, मिलेट्स वाले व्यंजन और खिचड़ी भी परोसी जाएगी।
यह व्यवस्था हरियाणा के सभी 14,253 स्कूलों में लागू की जा रही है। इसमें 8,671 प्राइमरी स्कूल और 5,582 अपर प्राइमरी स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा के साथ बच्चों की बेहतर सेहत के लिए सजग सरकार
राज्य सराकर ने इन सबके लिए 658 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसमें से 457.2 का योगदान हरियाणा सरकार का होगा और केंद्र सरकार सिर्फ बाकी रकम का ही भुगतान करेगी। मतलब, खट्टर सरकार इस योजना का अधिकतर भार अपने कंधे पर उठाने के लिए तैयार है।

दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे अन्य राज्यों में बच्चों को उपलब्ध करवाए जाने वाले मध्याह्न भोजन का सर्वे करें, ताकि उन्हें प्रोटीन युक्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाई जा सके।
इसी को ध्यान में रखकर मिडडे मील में कुछ नई चीजें भी शामिल की गई हैं, जिससे बच्चों को स्वाद बदलने का भी मौका मिलेगा और उन्हें ज्यादा पौष्टिक आहार भी उपलब्ध हो सकेगा।
वैसे तो राज्य भर के स्कूल में बच्चों के लिए रसोइए मिडडे मील तैयार करते हैं। लेकिन, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर के शहरों में सिर्फ मिडडे मील हेल्परों की आवश्यकता पड़ती है। क्योंकि, यहां इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन की ओर से भी भोजन उपलब्ध करवाया जाता है।
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