2024 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की नवीन पटनायक सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ओडिशा सरकार ने लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए राज्य वित्त पोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना लागू करने को मंजूरी दे रही है। इसके अलावा आदिवासी भाषाओं के संरक्षण के लिए एक आयोग की स्थापना के लिए भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

सीएम पटनायक की कैबिनेट बैठक में ये बताया गया कि LABHA (लघु बाण जात्य द्रव्य क्राय) योजना जो पूर्ण रूप से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित है उसके तहत , एमएफपी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य हर साल सरकार द्वारा तय किया जाएगा।
आदिवासी, जो एमएफपी के 99 प्रतिशत प्राथमिक संग्राहक हैं, आदिवासी विकास सहकारी निगम ऑफ ओडिशा लिमिटेड (टीडीसीसीओएल) के संग्रह केंद्रों पर उपज बेच सकेंगे।
एसटी और एसटी विकास मंत्री जगन्नाथ साराका, राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुदाम मार्ंडी और मुख्य सचिव पीके जेना ने बताया कि LABHA योजना को मिशन शक्ति की महिला एसएचजी के साथ सिंक्रनाइज़ किया जाएगा।
ओडिशा के खरीद केंद्रों का प्रबंधन एसएचजी या टीडीसीसीओएल द्वारा सहायता प्राप्त अन्य अधिसूचित एजेंसी करेगी। मंत्री ने बताया एसएचजी और अन्य एजेंसियों को दो प्रतिशत का कमीशन मिलेगा।
खरीद स्वचालन प्रणाली एमएफपी के कुल संग्रह, प्राथमिक कलेक्टर के विवरण और खरीद बिंदुओं को कैप्चर करेगी। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासियों को मिलने लाभ में पारदर्शिता रहेगी।
इसके अलावा नवीन पटनायक सरकार ओडिशा की 21 जनजातीय भाषाओं को संरक्षित करने की योजना के तहत एक आयोग स्थापित करने का निर्णय लिया।
इस आयोग के जरिए बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। भाषाओं का दस्तावेजीकरण करेगा और उन्हें संरक्षित करेगा, उनके उपयोग को बढ़ावा देगा और भाषाई अधिकारों की रक्षा करेगा। याद रहे पटनायक सरकार पहले ही राज्य में संचालित बहुभाषी शिक्षा (एमएलई) कार्यक्रम में सभी 21 जनजातीय भाषाओं को शामिल कर चुकी है।


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