बाल श्रम को रोकने के लिए ओडिशा की सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं, लेकिन बावजूद इसके अभी भी कुछ हिस्सों में बाल श्रम की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने बाल श्रम को खत्म करने के लिए स्वयं सेवी संस्थानों का रुख किया है। इन लोगों से प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों की पहचान करने को कहा है जो बाल श्रम में लिप्त हैं। संसद की स्थायी समिति की बाल श्रम पर राष्ट्रीय नीति की 52वीं रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि प्रदेश में बाल श्रम अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
बाल श्रम को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने समिति के साथ बैठक के दौरान कहा कि हम ग्रामीण और शहरी के साथ अर्ध शहरी क्षेत्रों में बाल श्रम को रोकने के लिए एसएचजी को शामिल करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती बाल श्रमिकों की पहचान करना और उनकी सही उम्र का पता लगाना है। इन चीजों की वजह से यह एक कठिन चुनौती है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर घरेलू सर्वेक्षण करके इन बच्चों की पहचान की जाएगी। यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ये बच्चे स्कूल में नामांकित हैं या काम पर जाते हैं।

समिति के सदस्यों ने प्रदेश सरकार के अधिकारियों को सुझाव दिया है कि वह ग्राम और पंचायत स्तर पर एसएचजी को शामिल करने की संभावना की तलाश करें, इन लोगों को ट्रेनिंग दें जिससे कि यह इस काम को बखूबी कर सकें। स्वयंसेवी संस्थान के सदस्य हर घर का दौरा कर सकते हैं और स्कूलों में नामांकित बच्चों के बारे में डेटा एकत्र कर सकते हैं। इसके साथ ही मिशन मोड पर ग्राम सभा समितियों, ग्राम पंचायतों को रिपोर्ट कर सकते हैं।


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