ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार राज्य के सरकारी कॉलेजों में एडमीशन लेने के इच्छुक सभी मेडिकल छात्रों के लिए एक बांड लाई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा लाए गया ये बांड राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों पर लागू होगा। इस बांड के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई पूरी करने के बाद पासआउट डॉक्टरों को दो साल तक राज्य के किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में सेवा करनी होगी।

इस बांड को लागू करने के तहत राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास होने वाले डॉक्टरों को कम से कम दो साल तक सरकारी सेवा में बनाए रखने की मौजूदा नीति में संशोधन किया है। डीएमईटी, ओडिशा ये सुनिश्चित करेगा कि मेडिकल कॉलेज में बांड जमा किए बिना किसी भी प्रकार के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाए।
यह बांड सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के इच्छुक सभी उम्मीदवारों के लिए लागू होगा। राज्य सरकार के तहत ओडिशा में पीजी (मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, ट्यूटर, फैकल्टी, पीएसयू या अन्य विभागों में मेडिकल ऑफिसर) के बाद कोई भी सेवा या प्रशिक्षण पोस्ट पीजी बॉन्ड सेवा में गिना जाएगा।
मेडिकल कॉलेजों में उक्त पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल तक राज्य के किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में सेवा देनी होगी। बांड प्रावधान के अनुसार दो साल की सेवा के बाद, प्रत्यक्ष और साथ ही सेवारत डॉक्टरों को बांड की शर्त से मुक्त कर दिया जाएगा।
प्रमाणपत्रों को अब से कॉलेज प्राधिकारियों द्वारा अपने पास नहीं रखा जाएगा और प्रवेश समाप्त होने के बाद जारी किया जा सकता है।
यदि किसी उम्मीदवार को पाठ्यक्रम पूरा होने के तुरंत बाद हायर स्टडी का अवसर मिलता है, तो बांड हायर स्टडी पूरी करके लौटने के बाद से लागू हो जाएगा। उन्हें जेएमएफसी के समक्ष एक शपथ पत्र के रूप में एक घोषणा प्रस्तुत करनी होगी।
इस बांड की बाध्यता ये है कि ओडिशा के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद अगर दो साल की सेवा किसी सरकारी मेडिकल संस्थान में नहीं दी तो राज्य चिकित्सा परिषद (ओसीएमआर) किसी अन्य राज्य में रजिस्ट्रेशन के लिए एनओसी तब तक जारी नहीं करेगी जब तक कि उसे बांड शर्तों की पूर्ति के संबंध में डीएमईटी ओडिशा से मंजूरी नहीं मिल जाती।


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