ओडिशा के आदिवासी बहुल्य सुंदरगढ़ जिले में बहुत से ऐसे छोटे और सीमांत किसान है जो तत्काल नगदी की जरूरत के कारण कथित तौर पर संकटपूर्ण बिक्री का सहारा लिया है। ये ट्रेंड टांगरपाली ब्लॉक में बड़े पैमाने पर देखने को मिल रही है। यहां के किसान अपनी जरूरतों के कारण घाटा सहकर धान बेच रहे हैं।

टांगरपाली ब्लॉक के अलावा सुंदरगढ़ के अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही खबर आ रही है कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,183 रुपये प्रति क्विंटल से 600 रुपये से 700 रुपये कम पर धान बेच रहे हैं।
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार अधिशेष धान का उत्पादन करने वाले जिले में संकटकालीन बिक्री एक वास्तविकता बनी हुई है। धान खरीद प्रक्रिया के लिए अभी तक लगभग 53,798 किसानों ने पंजीकरण कराया है।सूत्रों की माने तो सुंदरजिले में हर साल ऐसा ही होता है। जिले के संकटग्रस्त किसान फसल कटने के तुरंत बाद नकदी पाने के लिए अपनी धान की फसल एमएसपी से नीचे बेच देते हैं।
सुंदरगढ़ की विधायक कुसु टेटे ने भी ऐसी ही हकीकत बयां की। विधायक ने बताया कि संकटग्रस्त बिक्री का सहारा आम तौर पर छोटे और सीमांत किसान लेते हैं। ये वो किसान होते हैं जिन्होंने सरकारी खरीद प्रक्रिया के लिए खुद का पंजीकरण नहीं करवाया होता है।
ऐसे किसानों के पास जैसे ही धान की फसल कट कर आती है गरीब किसानों को नकदी प्राप्त करने का दबाव महसूस होने लगता है। उन पर धान की खेती में लगाए गए उधार के पैसे चुकाने का लगातार दबाव रहता है ऐसे में सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही अपने खेत का धान कम दाम पर घाटा सहकर बेच देते हैं।


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