आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संयुक्त प्रोजेक्ट्स नागार्जुन सागर और श्रीशैलम परियोजनाओं का परिचालन नियंत्रण अब कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के नियंत्रण में होगा। इसको लेकर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों के प्रमुख अभियंताओं की मौजूदगी में आगे के प्लान पर चर्चा की गई।
नागार्जुन सागर और श्रीशैलम प्रोजेक्ट्स को लेकर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव देबाश्री मुखर्जी के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अभियंताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ये चर्चा इस हफ्ते बुधवार को नई दिल्ली में हुई एक अहम बैठक के दौरान की गई। बैठक को लेकर आंध्र प्रदेश ईएनसी (जल संसाधन) नारायण रेड्डी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नागार्जुन सागर और श्रीशैलम सहित कृष्णा नदी पर अन्य प्रोजेक्ट्स का नियंत्रण केआरएमबी को सौंपने पर सहमति बनी है।

नारायण रेड्डी ने कहा, " प्रोटोकॉल के तहत प्रोजेक्ट्स के जुड़े सभी मुद्दों को एक सप्ताह के भीतर केआरएमबी को सौंपना होगा। जिसके बाद प्रोजेक्ट्स का वास्तविक नियंत्रण एक महीने के भीतर सौंपा दिया जाएगा। बिजली परियोजनाओं और अन्य परियोजनाओं का नियंत्रण केआरएमबी को सौंपने से संबंधित तकनीकी मुद्दों पर चर्चा के लिए 15 दिनों के बाद एक और बैठक होगी।"
ईएनसी रेड्डी ने बताया कि बैठक के दौरान, तेलंगाना चाहता था कि 28 नवंबर से पहले की स्थिति बरकरार रखी जाए, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया।
बता दें कि 15 जुलाई 2021 के केआरएमबी के अधिकार क्षेत्र को जारी अधिसूचना के अनुसार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों को उक्त राजपत्र अधिसूचना की अनुसूची -2 में उल्लिखित कृष्णा नदी की सिंचाई और बिजली परियोजनाओं को केआरएमबी को सौंपने का आदेश दिया गया था। लेकिन दोनों राज्यों केंद्र के आदेशों को पालन नहीं किया। लेकिन 28 नवंबर, 2023 में कृष्णा नदी जल विवाद एक बार फिर सामने आया जब आंध्र और तेलंगाना आमने- सामने देखे। ऐसे में जल शक्ति मंत्रालय इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और प्राथमिकता के आधार पर इसे सुलझाने का प्लान तैयार किया।


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