सारस पक्षी के संरक्षण के लिए मध्य और महाराष्ट्र दोनों राज्य संयुक्त रूप से प्रयास करेंगे। विलुप्त होते सारस पक्षियों के संरक्षण के दिशा में ये बड़ा कदम माना जा रहा है। सारस पक्षी के अधिवास को बनाए रखने के लिए मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में दोनों राज्यों ने एक शपथपत्र देकर ये जानकारी दी है।
मध्य प्रदेश वन विभाग ने कहा कि गोंदिया जिले के लिए 61.50 करोड़ रुपए की सारस पक्षी संवर्धन योजना मंजूर की गई है। विद्युत तारों से संरक्षित व पक्षियों को बचाने के लिए 41 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 8 अगस्त 2022 को गोंदिया और मध्यप्रदेश वन विभाग ने सारस पक्षी के संवर्धन की दृष्टि से बैठक आयोजित कर चर्चा करने की जानकारी शपथपत्र में दी है।

वहीं अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने गोंदिया व भंडारा परिक्षेत्र के उपवन संरक्षकों को मध्यप्रदेश सरकार के समन्वय साधने का आदेश दिया है। मुंबई स्थित बॉम्बे नेचरल हिस्ट्री सोसाइटी से हुए करार अनुसार उन्होंने अंतिम रिपोर्ट अनुसार संवर्धन का काम करने की जानकारी दी है। अन्य प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
बता दें कि मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला सारस संरक्षण के मामले में सबसे आगे है। इसके अलाव गोंदिया, भंडारा जिलों की अपेक्षा बालाघाट में सर्वाधिक 49 सारस पाये गये है। दूसरे स्थान पर गोंदिया जिला है जहां 31 सारस तथा भंडारा जिले में महज 4 सारस मिले है। सारस गणना के बाद आंकड़े सामने आ गये है। जिला प्रशासन द्वारा सेवा संस्था के सारस संरक्षण कार्य की सराहना की एवं आगे भी सारस संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते रहने की बात कही।


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