MP News: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM Janman Yojana) के तहत आर्थिक रुप से पिछड़ी जनजातियों को संपन्न बनाएंगी। इसके लिए मोहन यादव सरकार ने एक योजना बनाई है। इस योजना के तहत मोहन सरकार प्रदेश में विशेष जनजातियों के विकास के लिए नए वन-धन केंद्र खोलेगी।
दरअसल, प्रदेश में बैगा, सहरिया और भारिया विशेष जनजातियां घोषित हैं। इन जनजातियों को वन विभाग के अंतर्गत संचालित लघु वनोपज संघ द्वारा नए वन धन केंद्र खोलकर आर्थिक रूप से संपन्न बनाया जाएगा। इसके लिए मोहन सरकार प्रदेश के 18 जिलों में 201 नए वन-धन केंद्र खोलेगी। इन वन धन केंद्रों में लघु वनोपजों का प्रसंस्करण कर उन्हें बाजार में अच्छी दरों पर बेचने का कार्य किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमपी में बैगा जनजाति की संख्या 03 लाख 63 हजार 47, सहरिया की 05 लाख 78 हजार 557 तथा भारिया की 33 हजार 517 जनसंख्या है। वहीं, परिवार के छोटे बड़े सभी सदस्यों को मिलाकर इनकी संख्या 11 लाख से अधिक है। प्रदेश के दतिया में तीन, डिंडोरी में 20, गुना में 12, ग्वालियर में 12, कटनी में दो, मंडला में 19, मुरैना में आठ, उमरिया में पांच, रायसेन में दो केंद्र खोले जाएंगे।
इतना ही नहीं, नरसिंहपुर में पांच, शहडोल में 31, श्योपुर में 16, शिवपुरी में 15, सीधी में छह, अनूपपुर जिले में 13, अशोकनगर में चार, बालाघाट में नौ और छिंदवाड़ा में 19 वन धन केंद्र खोले जाने हैं। ये वन धन केंद्र, केंद्र सरकार स्वीकृत करती है और इसके लिए राशि भी उपलब्ध कराती है। राज्य के वन विभाग ने 201 वन धन केंद्र खोलने के प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं, जिनमें से 52 की स्वीकृति मिल गई है।
मोहन सरकार ने केंद्र को भेजा प्रस्ताव
प्रदेश के 18 जिलों के विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में 201 केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। प्रदेश के 827 वनग्रामों में से 793 वन ग्रामों के संपरिवर्तन की प्रस्तावित अधिसूचना जिला स्तर पर जारी हो गई है। पिछले 10 वर्षों में जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के विरुद्ध 14 हजार 256 पंजीबद्ध प्रकरणों में से 10 हजार 80 प्रकरण निराकृत किए गए है।


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