कृषि में भूजल का सबसे अधिक खर्च होता है इसलिए महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि खेती में ऐसी योजनाएं अपनाई जाए ताकि पानी की बजत की जाए। इसी प्रयास के तहत पानी के संकट का सामना कर रहे महाराष्ट्र में माइक्रो इरिगेशन को और बढ़ावा दिया जाएगा। ड्रॉप मोर क्रॉप' के कांन्सेप्ट को और अच्छी तरह से खेत-खेत तक पहुंचाकर कम पानी में खेती की जा सके।

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने बताया सूक्ष्म सिंचाई योजना का दायरा बढ़ाने को लेकर सरकार सकारात्मक. महाराष्ट्र माइक्रो इरिगेशन में योगदान देने वाले बड़े राज्यों में शामिल है। मंत्री ने बताया महाराष्ट्र के कई क्षेत्र सूखे की भयंकर मार झेलते है, भयंकर सूखे के कारण किसानों को खेती करना बहुत मुश्किल हो रहा है।
इसके अलावा भूजल का बड़ा हिस्स खेती पर खर्च होती है इसीलिए महाराष्ट्र सरकार चाहती है खेती के जरिए ही पानी की बचत की जाए और कम से कम पानी में खेती की जाए। महाराष्ट्र में सूखे का संकट का संकट रहता है खेती के लिए पानी का अभाव है इसलिए बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है क्योंकि इसमें कम पानी लगता है।
गौरतलब है कि भारत का करीबी 11 प्रतिशत माइक्रो एरिगेशन क्षेत्र महाराष्ट्र राज्य में है, महाराष्ट्र सरकार अब इसे और बढ़ाने का प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने मुंबई में एक कार्यक्रम में जानकारी दी कि राज्य सरकार ड्रॉप मोर क्रॉप' सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत एरिया बढ़ाएगी, इसके साथ इसके अंतर्गत आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार को प्राप्त हुई एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक देश में 83 लाख हेक्टेयर एरिया माइक्रो इरिगेशन में कवर है. जिसमें से महाराष्ट्र में 9 लाख 38 हजार हेक्टेयर एरिया शामिल है। इस तरह से महाराष्ट्र माइक्रो इरिगेशन में योगदान देने वाले बड़े राज्यों में शामिल है।
'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' यानी प्रति बूंद सूक्ष्म सिंचाई योजना में आ रही समस्याओं को लेकर राज्य के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे से इरिगेशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस योजना को बढ़ाने में आ रही दिक्कतों के बारे में बता की। मंत्री ने इस योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों का समाधान करने के लिए अधिकारियों को आदेश दिया।


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