प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के सोलापुर में रे नगर हाउसिंग सोसाइटी का उद्धाटन किया। दो जून की रोटी के लिए हर दिन संघर्ष करने वालें लोगों का अपना घर का सपना सच हो गया और लगभग 30 हजार ऐसे परिवारों को घर मिल गया।

जिन लोगों को इस सरकारी योजना के तहत घर मिले हैं वो लाभार्थी, ज्यादातर बीड़ी श्रमिक, निर्माण मजदूर, रिक्शा-चालक और दैनिक वेतन भोगी, असंगठित क्षेत्रों का एक बड़ा घटक हैं। ये वो लोग हैं जिनके पास दिन भर चैन की सांस लेने की फुरसत भी नहीं हैं, सरकार की बदौलत अब उनके पास अपना खुद का घर होगा।
गौरतलब है कि ये आवास परियोजना उसी क्षेत्र में आई है जहां श्रमिक कई दशकों से रहते थे। यह कॉलोनी कभी कपड़ा श्रमिकों का केंद्र थी। कपड़ा मिलें बंद होने के बाद, हजारों लोगों ने अपनी नौकरियां गवां दी थी और बीड़ी कारखानों में वैकल्पिक काम की तलाश की और जीवन-यापन जैसे-तैसे कर रहे हैं।
श्रमिकों को घर उपलब्ध कराने की अवधारणा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का एक पुराना सपना था। पूर्व सीपीआई (एम) राज्य सचिव और विधायक नरसैया एडम ने लोगों की आजीविका, प्रत्येक परिवार के लिए एक आवास और असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष किया था।
शुक्रवार को एडम ने बताया पांच साल पहले जनवरी 2019 में मोदी ने सोलापुर में हाउसिंग कॉलोनी की आधारशिला रखी गई थी। यह हम में से प्रत्येक के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए मकान एक बड़ी उपलब्धि है। घरों के साथ-साथ पानी और बिजली जैसी सभी बुनियादी जरूरतें मुहैया कराई जाएंगी।"
एडम ने इस परियोजना को हकीकत में बदलने के लिए मोदी और उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस को श्रेय दिया।
बता दें रे नगर हाउसिंग सोसायटी 350 एकड़ में फैली हुई है। इसमें 30,000 घर होंगे. फिलहाल 15,000 घर बन चुके हैं. पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हाउसिंग कॉलोनी में सात पानी की टंकियां होंगी। परिसर के भीतर एक सीवेज उपचार संयंत्र, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाएं, एक जिला परिषद स्कूल और एक अस्पताल होगा।


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