महाराष्ट्र सरकार ने सिकल सेल रोग पर नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत रोगियों की पहचान, जांच, उपचार और रोकथाम के उपाय, जागरूकता समेत कई कार्य सौंपे गए हैं।
सिकल सेल रोग को लेकर केंद्र सरकार ने व्यापक स्तर पर जागरूता और उपाचर की व्यवस्था विकसित करने को कहा है। दरअसल, केंद्र का लक्ष्य सिकल सेल को 2047 तक देश से पूरी तरह खत्म करना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत महाराष्ट्र में वर्ष 2008 से के हिस्से के रूप में स्क्रीनिंग, एचपीएलसी परीक्षण के माध्यम से विशेष उपचार और निदान की व्यवस्था दी जा रही है।

वहीं अब महाराष्ट्र सरकार ने सिकल सेल रोगियों की पहचान के लिए राज्य, जिला और तालुका स्तर पर समितियों के गठन के निर्देश जारी किए हैं। इस समिति को रोगियों की जांच, उपचार और रोकथाम के सभी महत्त्वपूर्ण उपाय करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।
नेशनल एलायंस ऑफ सिकल सेल ऑर्गेनाइजेशन (NASCO) के सचिव गौतम डोंगरे के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग मरीजों की पर्याप्त जांच करने में पिछड़ रहा है। हालांकि उन्होंने राज्य सरकार की पहल की सराहना की है।
वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक सिकल सेल रोगियों को दवाएं उपलब्ध ना होने के कारण बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महाराष्ट्र में नंदुरबार और गढ़चिरौली जैसे आदिवासी समुदायों के खासी परेशानी झेलनी पड़ती है।


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