महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है जिसके तहत पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ उठाने का मौका दे रही है।

हालांकि सरकार ने इसके संबध में जो Government Resolution जारी किया है, उसके अनुसार 1 नवंबर 2005 के बाद नौकरी में शामिल हुए कर्मचारियों को ही ये पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ उठाने के का मौका मिल रहा है। उन्हें छह महीने के अंदर इसके लिए अप्लीकेशन जमा करनी होगी।
कौन होगा पात्र
जीआर में स्पष्ठ लिखा है कि ये केवल उन्हीं कर्मचारियों पर लागू होता है जिनके संबंधित पदों के लिए विज्ञापन 1 नवंबर 2005 से पहले जारी किए गए थे, लेकिन वे उस तिथि के बाद सेवा में शामिल हुए थे।
कैबिनेट की मिल चुकी है मंजूरी
कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के बजाय ओपीएस चुनने का विकल्प देने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी को महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया है कि अगर कर्मचारी जीआर जारी होने की तारीख से छह महीने के अंदर इसके लिए अनुरोध नहीं जमा करत पाते हैं तो उन्हें एनपीएस के तहत लाभ प्राप्त होता रहेगा।
कर्मचारी का ओपीएस के लिए अनुरोध को मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित अधिकारियों को ऐसी मंजूरी के दो महीने के अंदर आवश्यक आदेश जारी करना होगा। इसके बाद, कर्मचारी का एनपीएस खाता बंद कर दिया जाएगा, और एक सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाता खोला जाएगा। धनराशि का ट्रांसफर कर्मचारी के एनपीएस खाते में जमा हुई राशि, ब्याज सहित, जीपीएफ खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
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इसके अलावा एनपीएस अकाउंट में राज्य सरकार का हिस्सा राज्य निधि में ट्रांसफर किया जाएगा। ओपीएस के लाभ ओपीएस के तहत, एक सरकारी कर्मचारी अपने अंतिम आहरित वेतन के 50% के बराबर मासिक पेंशन का हकदार है। खासकर ओपीएस के तहत कर्मचारी योगदान की कोई आवश्यकता नहीं थी।
बता दें वर्ष 2005 में ओपीएस को महाराष्ट्र राज्य में बंद कर दिया गया था। नई पेंशन योजना (एनपीएस) एनपीएस के तहत, एक राज्य सरकार का कर्मचारी अपने बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान देता है, फिर धनराशि को पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा विनियमित अनुमोदित पेंशन फंड में निवेश किया जाता है, और रिटर्न मार्केट परफॉमेंस से जुड़ा होता है!
महाराष्ट्र सरकार का कर्मचारियों को ओपीएस चुनने का मौका देने का निर्णय कर्मचारियों को एक ऑप्शन देता है जो योजना के गारंटीकृत पेंशन लाभ को पसंद करते हैं। सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने और सेवानिवृत्ति के दौरान उनकी वित्तीय लाभ सुनिश्चित करना ही सरकार का उद्देश्य है।
क्या है OPS?
इस स्कीम में पेंशन देने के लिए कर्मचारियों के वेतन में किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाती है। ओपीएस स्कीम के तहत सरकारी कर्मचारियों की नौकरी में रहते हुए अंतिम बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत अर्थात आधी राशि तक रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में दिया जाता है. इस स्कीम के तहत रिटायरमेंट के बाद मेडिकल भत्ता और मेडिकल बिलों की रिम्बर्समेंट यानी प्रतिपूर्ति भी देती है।
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