छत्तीसगढ़ में महादेव बेटिंग एप की गूंज अब महाराष्ट्र में भी पहुंच गई है। महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान इस एप घोटाले को लेकर जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान आरोप लगाए गए कि महादेव एप घोटाले के पैसे को रियल स्टेट में लगाया गया है। इस पर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमने बिल्डर की पहचान कर ली है और इस मामले में एसआईटी और ईडी जांच कर रही है।
सदन के दौरान विपक्ष के विधायकों ने इस मामले पर कई सवाल किए और सरकार को घेरने की कोशिश की। इन तमाम सवालों के जवाब देते हुए फडणवीस ने कहा कि मैं देश के फिल्मी सितारों से अपील करता हूं कि वह भविष्य में इस तरह के एप का प्रमोशन ना करें। इस पूरे मामले की जांच अगले दो महीने में पूरी कर ली जाएगी। इस मामले में एनआईए जांच की जरूरत नहीं है, क्योंकि इडी पहले ही इस मामले की जांच कर रही है।

भाजपा नेता आशीष शेलार ने कहा कि इस एप के जरिए बिल्डरों ने निवेश किया है। इन लोगों ने हाई-फाई प्रोजेक्ट में भी पैसा लगाया है। जिसपर फड़णवीस ने कहा कि मामले की ईडी जांच कर रही है और इसमे मुंबई पुलिस भी अपनी जांच कर रही है। महादेव एप की पैरेंट कंपनी के मालिक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। कुल 67 इस तरह के एप हैं, जो आपस में जुड़े हैं। इनका एक पोर्टल भी है जिसमे 80-20 फीसदी की इनकी साझेदारी है। इसका रजिस्ट्रेशन अमेरिका के वेनेजुएला में किया गया है।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने पूछा कि आखिर इस मामले में प्रदेश की आटी सेल क्या कर रही थी। जिसपर फडणवीस ने कहा कि फिजिकली प्रदेश में जुआ बंद है लेकिन अब इन लोगों ने ऑनलाइन शुरू कर दिया है। इसका पूरा सिस्टम व्हाट्सएप पर चलता है। साइबर सेल व्हाट्सएप और टेलीग्राम की मॉनिटरिंग नहीं कर सकती है। ऐसे में डेटा शेयरिंग को लेकर नया कानून बनाने पर विचार किया जा रहा है।


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