भारत में कुल मिलाकर 9 प्रजाति के गिद्ध पाए जाते हैं। इसमें अकेले मध्य प्रदेश में सबसे अधिक प्रजातियां देखी जाती हैं। यहां 7 प्रजाति के गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी गिद्ध होते हैं जो सर्दी के बाद चले जाते हैं। ऐसे में गिद्धों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है।
प्रथम चरण में वर्ष 2023-24 में 16 से 18 फरवरी को हुई गिद्ध गणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या 10000 के पार पहुंच चुकी है। इससे पहले वर्ष 2021 की गिद्ध गणना में प्रदेश में 9446 संख्या पाई गई थी। वर्ष 2023-24 में गिद्धों की गणना के मुताबिक ग्वालियर संभाग के पांच मंडलों में ही गिद्धों की संख्या 641 मिली।

ग्वालियर जोन के ग्वालियर भिंड, मुरैना, दतिया और शिवपुरी के जंगलों में 124 घर यानी घोसले पाए गए। वहीं ग्वालियर शहर की किला तलहटी में भी सबसे ज्यादा गिद्ध देखे गए। अकेले ग्वालियर जिले में ही संख्या 162 से बढ़कर 337 पर पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा 168 गिद्ध ग्वालियर के तिघरा रेंज में पाए गए।
ग्वालियर जोन के ग्वालियर भिंड, मुरैना, दतिया और शिवपुरी के जंगलों में 124 घर यानी घोसले पाए गए। वहीं ग्वालियर शहर की किला तलहटी में भी सबसे ज्यादा गिद्ध देखे गए। अकेले ग्वालियर जिले में ही संख्या 162 से बढ़कर 337 पर पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा 168 गिद्ध ग्वालियर के तिघरा रेंज में पाए गए।
एक रिपोर्ट न्यूज के मुताबिक, वन्य प्राणी विशेषज्ञ गौरव परिहार का कहना है कि मध्य प्रदेश के साथ ही ग्वालियर चंबल संभाग में भी गिद्धों की संख्या बढ़ रही है एक समय था जब इनकी संख्या लगातार घट रही थी। वन विभाग की गणना में भी सामने आ गया है कि गिद्धों का कुनबा बढ़ा है। पहले गिद्ध कभी नजर नहीं आते थे, लेकिन अब आसानी से शहरी क्षेत्र में भी गिद्ध नजर आ रहे हैं। खुशी की बात यह भी है कि हिमालय से माइग्रेट करके आने वाले हिमालयन वल्चर भी देखे गए हैं।


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