मध्य प्रदेश में कई जिले में नीलगाय का आंतक है। जिसके चलते किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। बड़ी संख्या में नीलगाय के झुंड फसलों को चट कर जाते हैं। ऐसे में सीएम डॉ. मोहन यादव की सरकार ने खास प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नीलगाय को फसलों ने ना सिर्फ बचाया जा सकेगा बल्कि इनका आतंक पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मध्य प्रदेश को न केवल स्वच्छता बल्कि सुंदरता का भी राज्य कहा जाता है. यहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ जैविक सुंदरता भी है। यही कारण है कि हर साल यहां लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य भी प्रदेश को अन्य राज्यों से अलग करते हैं।

हालांकि कुछ ऐसे जीव हैं, जो जिनसे प्रदेश के किसानों को भारी नुकसान होता है। नीलगाय सबसे अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। मध्य प्रदेश में 30 से 35 जिले ऐसे हैं जिनमें नीलगाय किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। उज्जैन संभाग, इंदौर संभाग और निमाड़ क्षेत्र में ऐसे कई जिले हैं, जहां नीलगायों का भारी आतंक है वहीं छिंदवाड़ा, रायसेन, टीकमगढ़, छतरपुर, नरसिंहपुर इलाके भी नीलगायों की समस्या से परेशान हैं।
ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार और वन विभाग ने मिलकर खास प्लान तैयार किया है। जिसके तहत नील गायों को पकड़ने के लिए अफ्रीकी विशेषज्ञों को बुलाने की तैयारी की गई है। अफ्रीकी एक्सपर्ट इन सभी नील गायों को पकडेंगे औ तेंदुओं के नए घर गांधी सागर अभयारण्य के वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा, जिससे पर्यावरण की रक्षा होगी।


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