Haryana News: हरियाणा में खट्टर सरकार कर रही विरासत बचाने की पहल, लुप्त हो रही झूमर और बंदरवाल की संस्कृति

Haryana News: हरियाणा की पुरातन संस्कृति और विरासत धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है. प्रदेश में झूमर, बंदरवाल और फूलझड़ी संस्कृति से गायब हो रही है। नई पीढ़ी को बेशक इनके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन बुजुर्ग महिलाओं के लिए इनकी अहमियत है। वे इसे सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक मानती हैं। नए जमाने के मंडप, चाइनीज लड़ियां और महंगे झूमरों की जगमगाहट के बीच प्राचीन झूमर और बंदरवाल अब अस्तित्व खोने लगी है।

प्रदेश के गांवों में उपलों, बडक़ुल्लों, कुल्हड़ और चक्की को महत्व देने वाले फिर भी दिख जाते है। बांगर, बागड़ी और देशवाली संस्कृति वाले तमाम जिलों में इन सब चीजों को अब भी महसूस किया जा सकता है। सिर पर पगड़ी, चौपाल पर हुक्का, खेत में बैल और पनघट पर महिलाओं का मेल मिलाप आज तक हमारी संस्कृति में रचा बसा हुआ है। होली, लोहड़ी, दशहरे और बैसाखी के मेले हरियाणा-पंजाब की गंगा जमुनी तहजीब नजर आती है।

cm khattar

दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के हरियाणा मंडप में प्रदेश झूमर, फूलझड़ी और बंदरवाल दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र बन गई। सोनीपत के गांव अटायल की रहने वाली कौशल्या देवी के स्टॉल पर महिलाएं हरियाणवी संस्कृति को देखने और संबंधित जानकारी करती नजर आई। इससे साबित होता है कि प्रदेश की युवतियों को अपनी संस्कृति को जानने का क्रेज है।

सोनीपत की रहने वाली कौशल्या देवी ने बताया कि उनकी पांचवीं पीढ़ी हरियाणवी धरोहर को बचाने के लिए कार्य कर रही है। पुरानी संस्कृति और विरासत से जुड़ी सभी वस्तुओं की जानकारी उन्होंने ट्रेड फेयर में साझा की हैं। झूमर, फूलझड़ी वह वस्तुएं हैं। जो नई-नवेली दुल्हन अपने ससुराल में लेकर जाती है। एक रस्म के तहत उसे लगाने का जिम्मा दूल्हे के बड़े भाई का होता है। इसी तरह बरसों पहले घर में विवाह के दौरान स्वागत के लिए बंदरवाल लगाई जाती थी। घरों के बाहर शादी में लगने वाले तोरण भी अलग ही आकर्षण रखते रहे हैं।

हरियाणा की मनोहर लाल सरकार ने संस्कृति को बचाने के लिए काफी सफल प्रयास किए हैं। राखीगढ़ी, सरस्वती नदी का उद्गम, ट्रेड फेयर में हरियाणा की संस्कृति से जुड़ी चीजों की प्रदर्शनी, सूरजकुंड मेले को पारंपरिक रूप देना, गीता जयंती महोत्सव और अब सरकार के प्रयासों से हरियाणा का गीत तैयार करने की जो पहल हुई है। उससे इतिहासकार, बुजुर्ग और हरियाणा की संस्कृति व धरती से जुड़े लोग इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं। सोनीपत जिला के गांव फरमाना निवासी जयभगवान कहते हैं कि प्रदेश सरकार ने संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। हरियाणा मंडप में भी आधुनिक वस्तुओं के साथ हरियाणवी संस्कृति की झलक से पुरातन हरियाणा की यादें ताजा हो रही हैं।

खेतों में गोबर पाथना, कुल्हड़ में चाय पीना, चौपाल पर हुक्का गुडग़ुड़ाना, धोती-कुर्ता और तुर्रे वाली पगड़ी बांधना व मस्त हास्यपूर्ण जीवनशैली हरियाणा की निशानी और पहचान है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस जीवनशैली को आत्मसात करते हुए हरियाणा एक, हरियाणवी एक का नारा दिया। उन्होंने यहां के महापुरुषों की जयंती को राज्य स्तर पर मनाने की पहल की। हाथ में लठ लिए हुए तस्वीर साझा की। बुलेट पर शहरों के हालचाल जानने की हरियाणवी संस्कृति को बल देने का काम किया। जिससे वे हरियाणा के सभी वर्गों के अंदर लोकप्रिय हो रहे हैं।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+