Haryana News: हरियाणा सरकार ने जल संकट को कम करने के लिए माइक्रो इरिगेशन के इस्तेमाल पर जोर दिया है। राज्य में पिछले 9 साल में ऐसा सिंचाई एरिया करीब 12 गुना बढ़ गया है। माइक्रो इरिगेशन से पानी की खपत कम होती है। ऊर्जा और उर्वरकों पर भी खर्चा काम आता है। इसके साथ ही उत्पादकता में इजाफा होगा। हरियाणा सरकार ने पानी की कमी को देखते हुए सिंचाई के तौर तरीके बदलने का फैसला किया है। साल 2014 से पहले प्रदेश में 33,507 हेक्टेयर भूमि पर ही माइक्रो इरिगेशन से सिंचाई होती थी। लेकिन अब इसका दायरा 4,26,636 हेक्टेयर हो गया है। दरअसल जल संकट से निपटने के लिए सिंचाई का यह सबसे कारगर तरीका है और राज्य सरकार इसे बढ़ा रही है।
भूजल का करीब 90 फीसदी इस्तेमाल खेती में होता है। खासकर धान और गन्ना की फसलों से भूजल का स्तर गिरता जा रहा है। ऐसे में पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कई राज्यों में पानी की किल्लत बनी हुई है। इसके बावजूद देश में सिंचाई का पैटर्न बहुत ज्यादा नहीं बदल पाया है। खेत में पानी भर देने या फ्लड इरिगेशन में पानी की खपत ज्यादा होती है। इससे मिट्टी में डाली गई खाद भी पानी के साथ नीचे चली जाती है। किसानों को पानी पर पैसा ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

माइक्रो इरिगेशन टेक्नोलॉजी से 48 फीसदी तक पानी की बचत
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक माइक्रो इरिगेशन टेक्नोलॉजी के उपयोग से 48 फीसदी तक पानी की बचत होती है। ऊर्जा की खपत में कमी आती है। माइक्रो इरिगेशन सिस्टम के साथ अगर खाद का घोल भी मिला दिया जाए तो 20 प्रतिशत खाद की बचत होगी। संतुलित उपयोग से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। माइक्रो इरिगेशन में बूंद-बूंद सिंचाई, सूक्ष्म फव्वारा, लोकलाइज इरिगेशन आदि आते हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर के लिए 75 फीसदी सब्सिडी मिलती है।
29 लाख किसानों के खातों में 7612 करोड़ रुपए दिए गए
हरियाणा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नायक सिंह सैनी ने एक कार्यक्रम में कहा कि सिर्फ माइक्रो इरिगेशन ही नहीं किसानों से जुड़े दूसरे मामलों में भी हरियाणा सरकार ने रफ्तार से काम किया है। साल 2004 से 14 तक 10 वर्षों में प्राकृतिक आपदा के कारण खराब फसलों के मुआवजे के रूप में पिछली सरकार ने 1158 करोड रुपए दिए। जबकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2014 से लेकर अब तक 9 वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर सीधे किसानों के बैंक खाते में पहुंचे हैं। पहले किसान अपनी फसल मंडी के अंदर ले जाता था तो 6 महीने तक पैसा नहीं आता था। लेकिन अब फसल बेचने के 72 घंटे के अंदर पैसा मिल जाता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि के तहत हरियाणा में 29 लाख किसानों के खातों में 7612 करोड़ रुपए दिए गए हैं।


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