राष्ट्रीय राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने के दिशा में बीते 9 वर्षों को भीतर कई बड़े प्रयास किए गए। जमुना को स्वच्छ बनाने, दिल्ली में सीवर लाइन से लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट, घरों को निर्माण के दौरान एंटी स्मॉग गन लगाने की अनिवार्यता के अलावा जीवाश्म ईंधन को प्रयोग के कम करने के लिए केजरीवाल सरकार ने वाहन नीति तक को अपडेट कर दिया है।
दिल्ली सरकार की ओर दावा किया जा रहा है कि आगामी पांच वर्षों को भीतर दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को एक नया आयाम दिया जाएगा, जिसके बूते पर राष्ट्रीय राजधानी ना सिर्फ प्रदूषण मुक्त होगी बल्कि लोगों को यहां किफायती ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी उपलब्ध हो सकेगा।

दिल्ली सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक दिल्ली सरकार ने सिर्फ बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करने के लिए ही नहीं बल्कि दिल्ली को मजबूत बनाने के लिए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रही है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों के मुताबिक केजरीवाल सरकार एक संयुक्त कार्यबल बनाने और एक साझा मंच विकसित करने पर भी काम कर रही है। जिसमें तेजी से सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक व्यवस्था होगी, ताकि इन मुद्दों से जुड़ी जानकारी का जल्दी आदान-प्रदान हो सके।
दिल्ली सरकार के इस प्रयास से खासकर यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि अगर दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो उन्हें अवैध रूप से न लाया जाए, बीएस मानकों का पालन सुनिश्चित हो और ईंट भट्टों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोका जा सके।
दिल्ली सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर 9 मुद्दों पर काम करने का प्लान तैयार किया है। जिसमें पराली जलाने से रोकना, पटाखों पर प्रतिबंध सहित कई चीजें शामिल हैं। इसको लेकर दिल्ली सरकार प्रदूषण के स्तर का एक डेटाबैंक भी तैयार करने में जुटी है।
केजरीवाल सरकार जिन मुद्दों पर काम करने वाली है उनमें पराली जलाने से रोकना, पटाखों पर प्रतिबंध, बीएस मानदंडों का अनुपालन, सार्वजनिक परिवहन को सीएनजी में बदलने, ईंट भट्ठों पर वायु प्रदूषण नियंत्रण और राष्ट्रीय राजधानी के आसपास के थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के प्लान शामिल हैं।
दिल्ली सरकार आगामी दिनों में विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन, उत्तरी क्षेत्रीय समितियों की स्थायी समिति अंतर-राज्यीय मंत्री बैठकें आयोजित करेगी। जिसमें पराली जलाने के प्रबंधन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
'40 साल बाद मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति'
सुप्रीम कोर्ट पिछले करीब 40 साल से सक्रिय रूप से दिल्ली और उसके आसपास के प्रदूषण से निपटने की कोशिशें कर रहा है, जबकि राजधानी की हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने 1984-85 में, दिल्ली में वाहनों के प्रदूषण, ताज महल के जीर्ण-शीर्ण संगमरमर और गंगा-यमुना नदी में प्रदूषण से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की थीं। लेकिन अब दिल्ली सरकार के प्रयासों के चलते स्थिति में काफी हद तक सुधार का दावा किया जा रहा है।
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