मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में प्रदेश सरकार किसानों के हितों में अहम फैसले ले रही है। प्रदेश सरकार ने किसानों की फसल बर्बाद होने पर उन्हें 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेअर का मुआवजा देने का फैसला लिया जोकि केंद्र सरकार के तय मानक से अधिक है। केजरीवाल सरकार ने किसानों के लिए निर्धारित की गई इस नीति का समर्थन किया है।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से इसको लेकर सवाल खड़े किए गए थे, लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि फिलहाल के लिए किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में बढ़ोत्तरी के फैसले को रोक दिया गया है क्योंकि इसको लेकर एलजी ने अभी तक अपनी सहमति नहीं दी है। लेकिन केजरीवाल सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि हमारी सरकार किसानों के हित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दरअसल दिल्ली सरकार की ओर से किए गए ऐलान के बाद किसानों की मांग को लेकर भाजपा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री केजरीवाल के घर का घेराव करने के लिए पहुंचा था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचा था। लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने सीएम के आवास से दूर ही रोक दिया।
दिल्ली के ओचंदी के आस-पास वाले गांवों में कृषि भूमि का अधिगृहण होना है, जिसको लेकर किसान नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा का प्रतिनिधिमंडल मुआवजा नीति की मांग कर रहा है। वीरेंद्र सचदेवा का कहना है कि 2015 में केंद्र सरकार ने नीति बनाई थी कि जिन किसानों की जमीन अधिगृहित होती है, उनके खेत के ऊपर से हाईटेंशन लाइन जाती है तो उन्हें निश्चित मुआवजा दिया जाएगा। यह नीति अन्य राज्यों में लागू है लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे लागू नहीं किया है।
भाजपा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने प्रदेश सरकार की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि हमने केंद्र द्वारा निर्धारित राशि से अधिक देने का फैसला लिया है, हम किसानों को 50 हजार रुपए प्रति हेक्टअर मुआवजा देंगे, अगर उनकी फसल को नुकसान पहुंचता है।


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