महाराष्ट्र सरकार ने प्रदेश में औषधियों के निरीक्षण के लिए ड्रग इंस्पेक्टर के लिए औषधि निर्माण में चार साल के कार्य अनुभव की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। जिसके बाद अब बी.फार्मा डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के लिए ड्रग इंस्पेक्टर बनने का रास्ता खुल गया है।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से अपर्याप्त औषधि निरीक्षकों के कारण औषधि निरीक्षण में होने वाली समस्याओं को भी दूर करने में मदद मिलेगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने राज्य में दवा दुकानों में बेची जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता और गुणवत्ता की जांच करने और दवा विक्रेताओं के निरीक्षण के लिए औषधि निरीक्षकों की नियुक्ति की है ताकि राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकें।
बता दें अभी तक महाराष्ट्र में ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए दवा निर्माता कंपनियों में दवा निर्माण का चार साल का अनुभव होना अनिवार्य था, जिस कारण बी.फार्मा कोर्स पूरा करने वाले कई छात्र ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए आवेदन नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनके पास चार साल का कार्य अनुभव नहीं होता होता है ।
इस पोस्ट के लिए चार साल के कार्य अनुभव का नियम होने के कारण राज्य के कई युवा नौकरी से वंचित रह गये. इस स्थिति के कारण खाद्य एवं औषधि प्रशासन के लिए औषधि निरीक्षक प्राप्त करना कठिन हो गया। इससे राज्य में दवाओं की गुणवत्ता जांचने और दवा विक्रेताओं के माल की जांच करने में दिक्कतें आ रही थीं। इसलिए कई वर्षों से इस शर्त को रद्द करने की मांग की जा रही थी।
उत्तराखंड सीएम धामी ने 'मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना' के तहत ट्रांसफर की धनराशि
बता दें महाराष्ट्र से पहले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह शर्त ख़त्म कर दी गई है. राज्य में बी.फार्मा के छात्रों ने इसके लिए राज्य सरकार को कई सुझाव दिये थे। जिसको संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार ने ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए भर्ती नियमों में ड्रग मैन्युफैक्चरिंग में चार साल के अनुभव की अनिवार्यता को शिथिल कर दिया है और इस संबंध में गजट जारी कर दिया है।


Click it and Unblock the Notifications