ओडिशा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। देउली में पुरी-रामचंडी-प्राची रिवरफ्रंट पर बुनियादी ढांचे के विकास के बाद अब केंद्र सरकार तीर्थयात्रा कायाकल्प और अध्यात्मिक विरासत संवर्धन ड्राइव यानि प्रसाद स्कीम के तहत बलांगीर में चौसठ योगिनी मंदिर को भी नया रूप देने की तैयारी कर रही है।
बता दें कि रानीपुर-झरियाल में चौसाथी योगिनी मंदिर को प्रसाद योजना के तहत चुना गया है। इस योजना के तहत इस मंदिर के बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत देशभर के 26 मंदिरों को चुना गया है जिसमे से एक यह मंदिर भी है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक पर तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करना है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार प्रसाद योजना के तहत राज्य सरकार को सुविधा केंद्र, पार्किंग क्षेत्र, सड़क निर्माण, स्मारिका दुकानें, वर्षा और छाया आश्रय और समग्र नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे घटक स्थापित करने के लिए फंड मिलेगा। जब यहां पर्यटकों का सर्वाधिक आगमन होता है तो इस दौरान घरेलू पर्यटकों के लगातार आने के बावजूद मंदिर में वर्तमान में आगंतुकों के लिए कोई पर्यटक सुविधाएं या कोई अन्य सुविधा मिल पाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां के मौलिक ढांचे को मजबूत कियाजा रहा है।
पर्यटन विभाग की ओर से जो आंकड़े मुहैया कराए गए हैं उसके अनुसार रानीपुर-झरियाल के मंदिर में पिछले साल 79,535 घरेलू पर्यटक आए थे, जबकि 2021 में यह संख्या 74,235 थी।
मंदिर में स्मारक के केंद्र में तीन मुख वाले भगवान शिव और पार्वती की एक छवि है, जो विभिन्न मुद्राओं में 64 योगिनियों से घिरी हुई है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण 9वीं या 10वीं शताब्दी में हुआ था। केंद्र ने 2017 में रानीपुर झरियाल के मंदिरों और उनके आसपास के खंडहरों को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित किया था।


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