ओडिशा में अगले कुछ वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हो सकती है। दिल्ली स्थित नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानि एनसीएईआर की ओर से जारी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कि अगले ढाई दशकों में यह पांच गुना तक बढ़ सकती है। ओडिशा में प्रति व्यक्ति CO2 उत्सर्जन किसी भी अन्य ग्रीनहाउस गैस के समान ग्लोबल वार्मिंग क्षमता के बराबर है।
प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन की बात करें तो राष्ट्रीय औसत 2.24 tCO2e है जबकि ओडिशा में यह प्रति व्यक्ति 6.15 टन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 2030 में बढ़कर 6.69 tCO2e हो जाएगा जबकि 2050 तक यह 31.41 tCO2e हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा में समग्र उत्सर्जन 7.85 पीसी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। यह 2005 में 102.73 tCO2e था जोकि 2018 में बढ़कर 274.54 tCO2e तक पहुंच गया। ऐसे में यह साफ संकेत है कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने की आवश्यकता है। लिहाजा प्रदेश को इसके लिए रणनीति बनाने की जरूरत है।

ओडिशा में कोयले का भंडार काफी ज्यादा है और इसके साथ ही अन्य खनिज भी उपलब्ध हैं। लेकिन आने वाले समय में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने की जरूरत है। साथ ही कार्बन कैप्चर और भंडारण की आवश्यकता है। हरित हाइड्रोजन में निवेश की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है। इसके लिए सरकार को इन बदलावों के लिए प्रभावी भूमिका निभाने की जरूरत है।


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