किसानों के लिए अच्छी खबर! अरहर की खेती के लिए मिल रही ₹3600 सब्सिडी, ऐसे करें फटाफट आवेदन

Subsidy on Arhar Dal: हमारे देश में किसानों की आर्थिक मदद के लिए अलग-अलग तरह की स्कीम चलाई जाती है। सरकार कई तरह से किसानों को प्रोत्साहित भी करती है। दालों से लेकर सब्जियों तक के लिए और घरेलू उत्पादन बढ़ावा देने और आयात को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें योजनाएं चला रही है।

बिहार सरकार खरीफ भी ऐसी कई योजनाएं चलाती रहती है। अब अरहर प्रोत्साहन कार्यक्रम 2024-25 के तहत अरहर की खेती को बिहार सरकार बढ़ावा दे रही है। आइए इसके बारे में आपको बताते हैं।

subsidy for cultivation of arhar dal

इन किसानों को मिलेगी सब्सिडी

इस योजना में एक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा औऱ प्रत्येक लाभार्थी को प्रत्यक्षण और बीज वितरण के लिए लाभार्थी को कम से कम एक एकड़ और अधिक से अधिक दो एकड़ की खेती पर सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इसके तहत अरहर खेती करने के लिए 3600 रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाएगी।

बिहार के 38 जिलों के किसान इस सब्सिडी का फायदा ले सकते हैं। अरहर बीज वितरण (10 वर्ष से पुरानी किस्म) स्कीम के तहत 2,500 रुपये प्रति क्विंटल प्रमाणित अरहर बीज का वितरण किया जा रहा है। इसके तहत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 2980 क्विंटल अरहर का प्रमाणित बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

ऐसे करें सब्सिडी के लिए अप्लाई

अरहर के बीजों पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान बिहार कृषि विभाग की आधिक आधिकारिक वेबसाइट https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर आवदेन कर सकते हैं। इसके अलावा इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्रीय कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।

ऐसे करें अरहर की खेती

अरहर की बुवाई से पहले खेतों में गोबर की कंपोस्ट खाद लगाकर मिट्टी को पोषण दें। अरहर अच्छी उपज देने के लिए रेतीली दोमट मिट्टी या मटियार दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है। अरहर के लिए अच्छी सिंचाई के साथ सूर्य की ऊर्जा भी आवश्यक है। अरहर की बुवाई जून-जुलाई के मौसम में पहली बारिश पड़ते ही या जून के दूसरे सप्ताह से शुरू की जाती है।

बुवाई के लिये अरहर की मान्यता प्राप्त बढ़िया किस्मों को ही चुनें, क्योंकि यह गुणवत्तापूर्ण उत्पादन देगा। अरहर की सिंचाई बारिश पर निर्भर करती है, लेकिन कम बारिश होने पर भी फसल को बुआई से 110 दिन बाद भी पानी देना चाहिए।

खेत में गहरी जुताई के बाद जल निकासी सुनिश्चित करें, वरना जलभराव के कारण अरहर खराब हो सकता है। खेतों में बुवाई से पहले बीज उपचार भी करना आवश्यक है ताकि कोई कीट न फैले। अरहर में बीमारियों और कीटों की निगरानी करते रहें और जैविक कीटनाशकों का ही उपयोग करें।

यहां होती है सबसे ज्यादा खेती

भारत में अरहर दाल बहुतायत में उगाई जाती है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में इसकी खेती सबसे ज्यादा की जाती है। भारत दुनिया का 85% अरहर उत्पादन करता है। अरहर के उत्पादन की बात करें तो करीब 1 हैक्टेयर उपजाऊ और सिंचित भूमि से 25-40 क्विंटल तक उपज ले सकते हैं।

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