नई दिल्ली। सीमा पर चीन से विवाद भी नया नहीं है, और देश के अंदर चीनी सामानों की दबदबा भी नया नहीं है। हां यह जरूर है कि समय समय पर इनको खदेड़ने की मांग होती रहती है। सीमा पर खूनी संघर्ष के बाद फिर से चीन के खिलाफ माहौल बना है। लेकिन क्या हम लोगों को पता है कि चीन तो अब पूरे देश में घुस चुका है। शायद ही ऐसा कोई सेक्टर हो जहां चीन का देश के बाजार दबदबा न हो। कई बार सुन चुके हैं कि चीन के इस दबदबे से मुक्ति मिलेगी, लेकिन उसके बाद के आंकड़े और ज्यादा बढ़कर आते हैं। अब यह सब कब बदलेगा, यह तो समय ही बता पाएगा, लेकिन आइये जानते हैं कि देश के किस सेक्टर में चीन का कितना दबदबा है।
लेकिन ऐसा नहीं है कि यह भारत की कमजोरी हैं। अगर भारत सरकार पॉलसियों में फेरबदल करे तो इनमें कई सेगमेंट में भारत आयातक की निर्यातक भी बन सकता है। बस देखने की बात यही होगी कि भारत अब भी कुछ करता है कि नहीं।
स्मार्टफोन मार्केट में चीन का करीब 70 फीसदी कब्जा
भारत का स्मार्टफोन का बाजार करीब 2 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी से ज्यादा की है। चीनी स्मार्टफोन से छुटकारा पाना अब काफी कठिन हो गया है, क्यों यह सबसे सस्ते हेंडसेट बाजार पर काबिज है।
दूरसंचार उपकरण के बाजार में चीन का करीब 25 फीसदी बाजार पर कब्जा
दूरसंचार उपकरणों का बाजार हालांकि इतना बड़ा नहीं है। यह मार्केट करीब 12,000 करोड़ रुपये का है। लेकिन इसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी तक है। यहां भी दिक्कत वहीं है कि चीनी दूरसंचार उपकरण सस्ते होने के चलते ज्यादा खरीदे जाते हैं। टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि अगर वे अन्य देशों के दूरसंचार उपकरण खरीदती हैं, तो उनकी लागत करीब 10 फीसदी ज्यादा आती है।
टेलिविजन का आधा बाजार चीन के कब्जे में
जहां तक भारत में टेलिविजन का बाजार की बात है तो यह करीब 25,000 करोड़ रुपये का है। इस बाजार में स्मार्ट टेलिविजन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 40 फीसदी के ऊपर बताई जाती है। वहीं गैर-स्मार्ट टेलिविजन मार्केट में यह हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी की है। यहां भी दिक्कत वहीं है कि अन्य टीवी करीब 20 फीसदी से ज्यादा महंगे पड़ते हैं।
होम अप्लायंसेज के बाजार भी करीब 12 फीसदी का कब्जा
भारत में होम अप्लायंसेज के बाजार का आकार करीब 50 हजार करोड़ रुपये का है। इसमें से चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी की बताई जाती है। लेकिन इस सिगमेंट में हालात तुरंत बदले जा सकते हैं, क्योंकि इस सेगमेंट में चीन की कोई बड़ी कंपनी नहीं उतरी है।
ऑटो पार्ट्स बाजार में करीब 25 फीसदी बाजार पर कब्जा
देश का ऑटो पार्ट्स बाजार काफी बड़ा है। एक अनुमान के अनुसार यह करीब 4.27 लाख करोड़ रुपये का बाजार है। इसमें चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी बताई जाती है। इस सेगमेंट की भी समस्या वहीं है कि चीन का माल सस्ता है।
इंटरनेट एप बाजार में चीनी का भरी दबदबा
भारत में करीब 45 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं। इसमें 66 फीसदी लोग कम से कम एक चीनी एप का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इस सेगमेंट में चीन से निजात पाना आसान है। लेकिन यह सरकार नहीं, बल्कि यह लोगों को खुद ही करना होगा। लोगों को टिकटॉक जैसे एप का मोह त्यागना होगा।
सौर ऊर्जा का लगभग पूरा बाजार चीन के कब्जे में
भारत की सौर ऊर्जा को लेकर बड़ी योजना है, लेकिन फिलहाल यह बाजार लगभग पूरा का पूरा चीन के कब्जे में है। भारत में अभी सौर ऊर्जा का मार्केट साइज 37,916 मेगावाट का है। इसमें चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी है। इस सेगमेंट में चीनी से छुटकारा पाना अभी तो कठिन है, क्योंकि देश में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां कमजोर हैं।
स्टील के मार्केट में चीन का करीब 20 फीसदी बाजार पर कब्जा
देश में स्टील के मार्केट का आकार करीब 108.5 मीट्रिक टन का है। इसमें चीनी सामान की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी तक है। यह भी एक ऐसा सेगमेंट है, जहां चीन से मुक्ति पाई जा सकती है। हालांकि यह कठिन काम होगा।
एपीआई के क्षेत्र में चीन का 60 फीसदी बाजार पर कब्जा
भारत में फार्मा/एपीआई का मार्केट साइज करीब 15,000 करोड़ रुपये के बराबर का है। इसमें चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी की बताई जाती है। इस सेगमेंट में फिलहाल चीनी माल से आजादी पाना कठिन होगा।


Click it and Unblock the Notifications