रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज समाप्त हो जाएगी. इस बैठक में आरबीआई के गवर्नर शाक्तिकांत दास ने यह फैसला लिया है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा. ऐसा लगातर 10वीं बार हो रहा है कि रेपो रेट नहीं बदला जा रहा है. चलिए आज जानते हैं कि रेपो रेट क्या है और इसका असर आम आदमी के जेब पर कैसे पड़ता है.

रेपो रेट को पॉलिसी रेट भी कहा जाता है. रेपो रेट का असर आपके लोन और ईएमआई पर पड़ता है. हालांकि कई और चीजे भी इसमें शामिल होती है. जिसे लोन में लगने ब्याज और ईएमआई तय की जाती है. अब फटाफट जान लेते हैं कि रेपो रेट क्या है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है?
What is Repo Rate: क्या होता है रेपो रेट ?
रेपो रेट वो दर होती है, जिसके बेस पर देश का क्रेंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अन्य बैंको को लोन देता है. अगर मान लीजिए रेपो रेट बढ़ जाती है, तो बैंको को ज्यादा रेट पर लोन लेना पड़ेगा. जो उन्हें मंहगा पड़ेगा. वहीं अगर ये दर घटती है, तो सभी बैंक रिजर्व बैंक से कम दर लोन ले सकते हैं.
लोन और ईएमआई (EMI) पर रेपो रेट का क्या पड़ेगा असर
जितने भी लोन बैंक में मौजूद होते हैं, जैसे होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन सभी रेपो रेट से जुड़े हुए होते है. अगर मान लीजिए बैंकों कम ब्याज दर पर कोई लोन मिल रहा है, तो वे अपने ग्राहको को भी कम ब्याज दर लोन दे सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अगर रेपो रेट बढ़ जाएं, तो बैंको को रिजर्व बैंक से लोन लेना महंगा हो जाएगा. ऐसे में बैंक भी ग्राहकों के लोन पर लगने वाले ब्याज को बड़ा सकते हैं. जिससे आपका ईएमआई बड़ा जाएगा.
फरवरी 2023 तक नहीं बदला रेपो रेट
फरवरी 2023 में रेपो रेट 6.5 फीसदी तय किया गया था. जिसके बाद से ही रेपो रेट यहीं चल रहा है. इस तरह रेपो रेट कहीं ना कहीं आपके लोन जैसे होम लोन, कार लोन और ऑटो लोन के ब्याज दर फर्क पड़ जाता है.


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