Budget 2024: बजट 2024 को पेश करने की तारीख नजदीक आ गई है. केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारामन संसद में 23 जुलाई को पूर्ण रूप से बजट पेश करने वाली है. बजट में कई ऐसे टर्म होते है, जिनका अर्थ आसानी से समझ नहीं आता है. जैसे कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, यह दोनों ही टर्म बजट में काफी बार इस्तेमाल होते हैं. आइए आज इन दोनों टर्म के बारे में विस्तार से समझते हैं.

क्या है कैपिटल एक्सपेंडिचर?
यह वह खर्च है, जो लंबे समय में इस्तेमाल होने वाले एसेट के सुधार या एसेट को खरीदने मेंं किया जाता है. इसके अलावा लंबे समय तक चलने वाली सेवाओं को लेने के लिए किया गया खर्च भी कैपिटल एक्सपेंडिचर के अंतर्गत आता है. इनमेंं मशीनरी, उपकरण, भवन, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा आदि शामिल हैं.
इन एसेट या सुविधा की वैल्यू समय के साथ कम हो जाती है. 2023 के बजट में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए लगभग 10 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया था. जो 2022 बजट के मुकाबले 37.4 प्रतिशत अधिक था.
क्या है रेवेन्यू एक्सपेंडिचर?
रेवेन्यू एक्सपेंडिचर वह खर्च है, जो दिन-प्रतिदिन के कार्यो को पूर्ण करने के लिए किया जाता है. सरकार अपनी आय का जो भी हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को वेतन या पेंशन के रूप में देती है. उसे रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में शामिल किया जाता है. इसके अलावा सरकार द्वारा अलग अलग मंत्रालय या विभाग को दिए गए पैसे भी इस खर्च में आते हैं. पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2023-24 में कुल खर्च में से 45,03,097 करोड़ रुपये रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में खर्च किया गया था. 2022-23 के मुकाबले यह 1.2 प्रतिशत अधिक था.
कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में क्या है अंतर
रेवेन्यू और कैपिटल एक्सपेंडिचर में अंतर मुख्य तौर पर समय सीमा को लेकर है. रेवेन्यू एक्सपेंडिचर छोटे अवधि के लिए किया जाता है. इसमें ज्यादातर दिन-प्रतिदिन के खर्चे शामिल होते हैं. वहीं कैपिटल एक्सपेंडिचर लंबे समय के लिए किया जाता है. यह ज्यादातर उन एसेट या सुविधाओं पर किया जाता है, जिससे लंबे समय तक फायदा हो. ऐसे एसेट की वैल्यू समय के साथ धीरे-धीरे कम हो जाती है.


Click it and Unblock the Notifications