क्या है Automated Trading, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान, जानिए सबकुछ
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Automated Trading : मुनाफा कमाने की चाह में लोग शेयरों में निवेश करते हैं। हालांकि, बाजार की चाल पर कड़ी नजर रखने के लिए यह एक बहुत अधिक समय लेने वाला काम है। इसके लिए बहुत अधिक अनुभव की भी आवश्यकता होती है। ये अनुभव समय के साथ-साथ उन लोगों के पास आता है जो फाइेंशियल निर्णय ले सकते हैं। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में प्रगति हो रही है, वैसे-वैसे लोगों की भूमिका कम होती जा रही है। ऐसे में एल्गोरिथम या ऑटोमैटेड ट्रेडिंग मार्केट को डेवलप करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए उभर रहा है। इसके अपने फायदे हैं, पर नुकसान भी हैं। जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

क्या है ऑटोमैटेड ट्रेडिंग

क्या है ऑटोमैटेड ट्रेडिंग

सावधानीपूर्वक प्री-डिफाइंड डायरेक्शंस के साथ, ऑटोमैटेड ट्रेडिंग मानव के कामों को मूल रूप से पूरा करता है। यह अधिक सटीकता के साथ स्टॉक खरीदने या बेचने के सही अवसरों की पहचान करने के लिए डेटा-आधारित इंटेलिजेंट एल्गोरिदम का उपयोग करता है। एल्गोरिथम ट्रेडिंग ने पहले ही बाजार में काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है और जानकार ट्रेडर्स कुशलता से इसके फायदे और नुकसान को माप रहे हैं और अधिकतम लाभ हासिल कर रहे हैं।

क्या हैं फायदे
होता है बेहतर विश्लेषण
इस टेक्नोलॉजी को एक प्रोसेस में सुविधा लाने के लिए डेवलप किया गया है। मार्केट डेटा के बेहतर विश्लेषण के लिए एल्गोरिथम ट्रेडिंग के कई फायदे हैं। पारंपरिक तरीके के उलट ऑटोमैटेड ट्रेडिंग ट्रेडर्स को अधिक एफिशिएंसी के साथ एक ही बार में बल्क ऑर्डर पूरे करने की सुविधा देता है। यह एक बार में अलग-अलग ट्रेड स्ट्रेटेजीज का उपयोग करते हुए ट्रेडर को कई खातों के माध्यम से ट्रेड करने में सक्षम बनाता है।

मानवीय भावना खत्म

मानवीय भावना खत्म

इस टेक्नोलॉजी में मानव हस्तक्षेप समाप्त हो जाता है। यानी ट्रेडिंग में मानवीय भावनाओं का कोई प्रभाव नहीं होता जिससे नुकसान की संभावना कम हो जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई मानवीय हस्तक्षेप न हो और ट्रेडर्स को डेटा-आधारित एल्गोरिदम के उपयोग के माध्यम से अधिकतम आरओआई प्राप्त होता है।

अधिकतम प्रोफिट की उम्मीद
नियमों को लागू करने से पहले, ऑटोमैटेड ट्रेडिंग बैक-टेस्टिंग करता है यानी अधिकतम सीमा तक विफलता की संभावना को कम करने के लिए नियमों का कठोर एक्जेक्यूशन। नतीजे में आपको सटीकता से अधिकतम लाभ होता है।

क्या हैं नुकसान

क्या हैं नुकसान

सिस्टम फैलियर
ऑटोमैटेड ट्रेडिंग सिस्टम प्री-डिफाइंड एल्गोरिदम पर काम करते हैं। ये पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर चलते हैं, इसलिए इन सिस्ट्म्स के विफल होने की संभावना रहती है। यदि कोई गड़बड़ होती है, तो लाभ मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

निगरानी की भी जरूरत
हालाँकि ट्रेड का एक्जेक्यूशन ऑटोमैटेड होता है, फिर भी इसे किसी तरह की निगरानी की आवश्यकता होती है। सिस्टम में सिस्टम की विफलता, बिजली कटौती, इंटरनेट कनेक्टिविटी में गड़बड़ आदि सहित कई तकनीकी गड़बड़ियां हो सकती हैं। इसके नतीजे ऑर्डर इनकंप्लीट हो सकते हैं और ट्रेडिंग की पूरी प्रोसेस में गड़बड़ियां आ सकती हैं।

ये है आखिरी जरूरत

ये है आखिरी जरूरत

ट्रेडिंग के लिए सोच-समझकर शॉर्टलिस्टिंग और स्ट्रेटेजीज के मैनेजमेंट की आवश्यकता होती है। ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज पहले से ही प्री-डिफाइंड हैं, इसलिए ऑटोमैटेड ट्रेडिंग ट्रेडर के लाइव मार्केट प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

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