डिविडेंड का मजा लेना है तो जान लीजिए ये जरूरी बातें, हर रिजल्ट सीजन में होगी मुनाफे की बारिश!

Dividend Calculation: रिजल्ट सीजन में शेयर बाजार के निवेशकों को तगड़ा मुनाफा पाने के खूब मौके बन रहे हैं, खासकर डिविडेंड स्टॉक्स तो निवेशकों के फेवरेट हैं, लेकिन अगर आपके मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर डिविडेंड होता क्या है तो आपको बता दें कि डिविडेंड पाने के लिए कुछ खास नियम और शर्ते होती है जिसके बारे में आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए।

What is a Dividend

इसके साथ-साथ आपको यह भी पता होना चाहिए कि कंपनियां आखिर डिविडेंड क्यों देती हैं और क्या ऐसा करने से कोई फायदा होता है या नहीं। चलिए इन सबके बारे में आपको जानकारी देते हैं।

आखिर क्या होता है डिविडेंड
चलिए आपको एकदम सरल तरीके से इसके बारे में बताते हैं। मान लीजिए आप जिस भी कंपनी में काम करते हैं उस कंपनी को बहुत बड़ा प्रॉफिट हुआ है और कंपनी ने इस बार सभी इंप्लाइज को सैलरी के साथ बोनस भी दिया है।

ठीक इस प्रकार कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरहोल्डर्स को देती हैं जिन्होंने उनके शेयर खरीद रखे होते हैं।

यह मुनाफा सीधे बैंक अकाउंट में आता है। इसमें जरूरी बात यह है कि जब कंपनी, लाभांश यानी डिविडेंड देने की घोषणा करती हैं तो वह उससे पहले एक रिकॉर्ड डेट भी निर्धारित करती है जिससे शेयरहोल्डर्स को यह जानकारी रहे है कि अगर वह उस रिकर्ड डेट तक वह शेयर खरीदते हैं तो ही उन्हें डिविडेंड मिलेगा।

उदाहरण के लिए मान लीजिए एक कंपनी ने 1 मई को डिविडेंड का एलान किया। यह हो गई अनाउंसमेंट डेट। अब कंपनी ने इसके लिए रिकॉर्ड डेट तय की 10 मई ।

यहां एक्स डिविडेंड हो जाएगी 9 मई । यानी डिविडेंड का हकदार बनने के लिए आपको 9 मई तक शेयर खरीदने होंगे। अगर डिविडेंड की रकम आपके खाते में 20 मई को आ जाती है, तो वह पेमेंट डेट हो जाएगी।

कितना डिविडेंड मिलेगा और रिकॉर्ड डेट क्या होगी, यह फैसला करने का अधिकार कंपनी के पास है। आपको बता दें कि अमूमन कंपनियां तिमाही नतीजों के बाद ही डिविडेंड की सिफारिश करती हैं।

कुछ कंपनियां अच्छी कमाई होने पर नतीजों से पहले डिविडेंड दे देती हैं। यह कंपनी की मर्जी पर होता है कि वह कब डिविडेंड देती हैं।

फेस वैल्यू और मार्केट वैल्यू यह दोनों ही शेयर की वैल्यू के दो तरीके होते हैं। मार्केट वैल्यू का मतलब है बाजार में शेयरों की खरीद और बक्री किस मूल्य पर हो रही है।

दूसरी ओर, फेस वैल्यू का मतलब है कि शेयरों की संख्या निर्धारित करते समय तय करती है।

उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी है एक्स और उसकी फेस वैल्यू 20 रु है और वह प्रत्येक शेयर 20 रु का लाभांश देने की घोषणा करती है तो इसका मतलब है कि कंपनी ने शत-प्रतिशत डिविडेंड का ऐलान किया है।

वहीं, अगर 30 रु प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान होगा तो इसका मतलब है कि 300 फीसदी डिविडेंड दिया जाएगा।

सभी कंपनियां नहीं देती है डिविडेंड

कई कंपनियां अपने निवेशकों को अपने साथ जोड़े रहने के लिए डिविडेंड देती हैं। वे शेयरहोल्डर को भी कंपनी का मालिक समझती हैं और मुनाफे पर उनका भी अधिकार मानती हैं।

वहीं, कुछ कंपनियां डिविडेंड के पैसे को बिजनेस की ग्रोथ में लगा देती हैं। वह मानती हैं कि इससे शेयरहोल्डर्स को सीधे-सीधे फायदा होगा।

आपको बता दें कि कंपनी अगर घाटे में है तो भी वह अपने शेयरधारकों को लाभांश दे सकती है। अगर कंपनी को नुकसान हुआ है तो वह पिछले साल के मुनाफे में से भी डिविडेंड बांट सकती है।

कई कंपनियां मुनाफे के अलावा रिजर्व से भी डिविडेंड देती हैं, ताकि कंपनी पर निवेशकों का भरोसा बना रहे।

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