नई दिल्ली, अक्टूबर 18। इस दुनिया में कोई भी टैक्स देना पसंद नहीं करता है। यदि आपके पास टैक्सेबल इनकम है तो आपके पास टैक्स चुकाने से बचने का कोई तरीका नहीं होगा। मगर आप किसी वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही अच्छी योजना बनाकर अपनी टैक्स लायबिलिटी को कम कर सकते हैं। भारत में इनकम टैक्स नियमों के तहत कुछ खर्चों और निवेशों पर टैक्स से छूट दी जाती है। यानी यदि आप कुछ खास चीजों में निवेश करते हैं या खर्च करते हैं तो आपको टैक्स कटौती और छूट का फायदा मिलेगा। जानते हैं ऐसे ही कुछ रास्तों के बारे में।
जीवन बीमा प्रीमियम, पेंशन योजना, प्रोविडेंट फंड का भुगतान
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सी जीवन बीमा प्रीमियम, प्रोविडेंट फंड, पीपीएफ, ईएलएसएस योजनाओं में निवेश, दो बच्चों तक के लिए भुगतान की गई ट्यूशन फीस, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र, हाउसिंग लोन के मूलधन के भुगतान में 1.50 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का दावा करने की अनुमति मिलती है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में निवेश
धारा 80 सीसीडी (1बी) के तहत कर्मचारी द्वारा एनपीएस में किए गए निवेश पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स कटौती का क्लेम किया जा सकता है। यह धारा 80सीसीडी (1) के तहत किए गए निवेश के अतिरिक्त है। धारा 80 सीसीडी 2 के तहत, एम्प्लोयर द्वारा एनपीएस में किए गए योगदान पर कटौती का दावा किया जा सकता है।
होम लोन
धारा 24 (बी) के तहत, एक व्यक्ति होम लोन के ब्याज भुगतान पर, अपनी प्रोपर्टी के लिए लिये गये होम इम्प्रूवमेंट लोन पर 2 लाख रुपये तक टैक्स बेनेफिट का दावा कर सकता है। लेकिन होम लोन के मूल भुगतान के लिए अदा की गई राशि का दावा धारा 80 सी के तहत 1.50 लाख रुपये की कुल सीमा के अंडर ही किया जा सकता है।
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम
धारा 80 डी के तहत, स्वयं और आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदने और प्रेवेंटिव हेल्थ चेक अप के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर कटौती का दावा किया जा सकता है। हालाँकि इसकी लिमिट अलग-अलग हैं।
विकलांग आश्रितों के रखरखाव/उपचार पर खर्च
विकलांग आश्रित के रखरखाव या चिकित्सा उपचार के लिए किए गए खर्च पर 75,000 रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। लेकिन गंभीर विकलांगता (80% या अधिक) के मामले में, कटौती 1.25 लाख रुपये तक हो सकती है।
मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भुगतान
धारा 80 डीडी (1 बी) के तहत निर्दिष्ट बीमारियों के लिए स्वयं और परिवार के आश्रित सदस्यों के चिकित्सा उपचार पर किए गए खर्च के लिए 40,000 रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। परिवार के किसी सदस्य के वरिष्ठ नागरिक होने की स्थिति में यह कटौती सीमा बढ़कर 1 लाख रुपये हो जाएगी।
एजुकेशन लोन का ब्याज
धारा 80ई के तहत, एक व्यक्ति आश्रित बच्चे या पति या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लिए गए शिक्षा लोन के ब्याज भुगतान पर कटौती का दावा कर सकता है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस कटौती की कोई ऊपरी लिमिट नहीं है।


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