नई दिल्ली, अगस्त 7। टैक्स डिडक्शन एट सॉर्स (टीडीएस) के रूप में करदाता द्वारा भुगतान किया गया अतिरिक्त टैक्स या छूट के बदले रिटर्न बकाया सरकार द्वारा उचित एसेसमेंट के बाद वापस किया जाता है। यह राशि "इनकम टैक्स रिफंड" के नाम से जानी जाती है। करदाता को यह रिफंड तभी प्राप्त होगा जब आयकर (आई-टी) विभाग आयकर रिटर्न (आईटीआर) को प्रोसेस करता है। आमतौर पर एक ईमेल के माध्यम से एक सूचना नोटिस के जरिए इसकी पुष्टि होती है। आयकर विभाग आईटीआर को तभी प्रोसेस करेगा जब ITR-V की हस्ताक्षरित कॉपी भेजने के किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड के माध्यम से रिटर्न विधिवत वेरिफाई हो।
कब इनकम टैक्स रिफंड का दावा किया जा सकता है
आपने अपने संगठन को सभी निवेश प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। परिणामस्वरूप, आपके नियोक्ता द्वारा काटे गए करों की राशि किसी वित्तीय वर्ष के लिए आपकी वास्तविक टैक्स लायबिलिटी से अधिक हो गई है। तब इनकम टैक्स रिफंड का दावा किया जा सकता है। या बैंक एफडी या बॉन्ड से आपकी ब्याज आय पर अतिरिक्त टीडीएस काट लिया गया तो क्लेम किया जा सकता है। इसी तरह सेल्फ-असेसमेंट पर आपके द्वारा भुगतान किया गया एडवांस टैक्स रेगुलर एसेसमेंट के अनुसार लागू वित्तीय वर्ष के लिए आपकी टैक्स लायबिलिटी से अधिक हो गया है तो भी इनकम टैक्स रिफंड के लिए क्लेम किया जा सकता है।
कैसे चेक करें रिफंड स्टेटस
आप नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की वेबसाइट के साथ-साथ आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर आयकर रिफंड स्टेटस को चेक कर सकते हैं। आगे जानिए चेक करने का प्रोसेस।
ये है आसान और पूरा प्रोसेस
रिफंड को ट्रैक करने के लिए एनएसडीएल की वेबसाइट पर जाएं। आपकी आसानी के लिए यहां हम लिंक (https://tin.tin.nsdl.com/oltas/refund-status-pan.html) शेयर कर रहे हैं। पैन और एसेसमेंट ईयर सहित डिटेल भरें और 'प्रोसीड' पर क्लिक करें। आपका इनकम टैक्स रिफंड स्टेटस दिखेगा।
ई-फाइलिंग पोर्टल पर
ई-फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन करें। या डायरेक्ट इस लिंक (https://eportal.incometax.gov.in/iec/foservices/#/pre-login/itrStatus) पर जाएं। एकनोलेजमेंट नंबर दर्ज करें। मोबाइल नंबर डालें। आयकर रिफंड स्टेटस के साथ आपके रिटर्न डिटेल वाला एक पेज दिखाई देगा।
आयकर रिफंड टाइम
रिफंड आम तौर पर आईटीआर दाखिल करने के एक महीने के भीतर प्रोसेस किया जाता है। सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) द्वारा रिफंड की प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद, रिफंड 20 से 45 दिनों के भीतर जारी कर दिए जाते हैं। 5 लाख रुपये तक के रिफंड के लिए पात्र करदाताओं के रिफंड को रिफंड प्रोसेस होने के एक सप्ताह के भीतर सीधे बैंक में क्रेडिट कर दिया जाता है। हालांकि, अगर करदाता आईटीआर भरने में गलती करता है तो देरी होने की संभावना है। आईटीआर और आई-टी विभाग के पास उपलब्ध विवरण में कोई मेल नहीं होने पर रिफंड रोक दिया जाता है। कई मामलों में, आईटीआर फॉर्म में गलत बैंक खाते की डिटेल दर्ज करने जैसी साधारण गलतियों के कारण आयकर रिफंड जारी नहीं किया जाता है या खारिज कर दिया जाता है। उस स्थिति में, अपने आईटीआर में उल्लिखित बैंक खाते की डिटेल को चेक करें। अगर रिफंड न मिले तो आप आयकर विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिये शिकायत करें। टोल फ्री नंबर के जरिये भी विभाग से जानकारी ली जा सकती है।
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